मुंगेर (MUNGER): जिले के बांक पंचायत में जल संरक्षण और स्वच्छता की दिशा में एक अनोखा और सफल प्रयोग सामने आया है, जिसने न सिर्फ प्रदूषित जल की समस्या का समाधान किया है बल्कि हजारों ग्रामीणों के जीवन में बड़ा बदलाव भी लाया है. यहां पुराने और गंदे पानी से भरे सिद्धि तालाब को अपशिष्ट स्थिरीकरण तालाब (WSP) तकनीक के जरिए दोबारा उपयोगी और स्वच्छ जल स्रोत में बदल दिया गया है.
कभी बांक पंचायत का सिद्धि तालाब गांव की पहचान हुआ करता था, लेकिन समय के साथ इसमें घरों और नालों से आने वाला गंदा पानी भरने लगा. लगभग 5000 परिवारों का घरेलू अपशिष्ट जल और आसपास के क्षेत्रों का ग्रे वाटर लगातार इसमें गिरता रहा, जिससे तालाब पूरी तरह प्रदूषित हो गया. हालात ऐसे हो गए कि इसका पानी न तो इंसानों के उपयोग के लायक रहा और न ही पशु-पक्षियों के लिए सुरक्षित बचा.
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रदूषण का असर केवल तालाब तक सीमित नहीं था, बल्कि यह धीरे-धीरे भू-जल (ग्राउंड वाटर) को भी प्रभावित कर रहा था. इससे इलाके में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और जल संकट का खतरा बढ़ता जा रहा था. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला जल एवं स्वच्छता समिति ने यहां अपशिष्ट स्थिरीकरण तालाब (WSP) प्रणाली लागू की. इस व्यवस्था के तहत तालाब में आने वाले गंदे और ग्रे वाटर को पहले एक विशेष ट्रीटमेंट यूनिट में रोका जाता है, जहां कई दिनों तक प्राकृतिक तरीके से उसका शुद्धिकरण किया जाता है. इसके बाद साफ पानी को सिद्धि तालाब में छोड़ा जाता है.
इस तकनीक की सफलता के बाद अब सिद्धि तालाब का पानी काफी हद तक साफ हो चुका है. इससे बांक पंचायत के करीब 5000 से अधिक लोगों की रोजमर्रा की पानी संबंधी जरूरतें पूरी हो रही हैं. साथ ही, यह क्षेत्र अब भू-जल पुनर्भरण की दिशा में भी बेहतर स्थिति में पहुंच गया है. स्वच्छ जल उपलब्ध होने के बाद यह तालाब अब मत्स्य पालन के लिए भी उपयोगी बन गया है, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका के नए अवसर पैदा हो रहे हैं. साथ ही, पर्यावरण संतुलन में भी सुधार देखने को मिल रहा है. यह प्रयोग अब ग्रामीण जल प्रबंधन और स्वच्छता के क्षेत्र में एक सफल मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जो अन्य इलाकों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है.

