चुनावी तैयारियों के बीच 20 दिन से लापता है गोपालगंज BDO, प्रशासन ने की निलंबन की सिफारिश, आयोग को भेजी शिकायत

    चुनावी तैयारियों के बीच 20 दिन से लापता है गोपालगंज BDO, प्रशासन ने की निलंबन की सिफारिश, आयोग को भेजी शिकायत

    गोपालगंज(GOPALGANJ):बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच गोपालगंज से एक चौंकाने वाली प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है. जिले के सदर प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) जितेंद्र कुमार पिछले 20 दिनों से लापता है.चुनावी कार्यों के लिए चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया के बीच बीडीओ का इस तरह अचानक गायब हो जाना प्रशासन और चुनाव आयोग दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है.

    प्रशासन ने चुनाव आयोग को लिखित शिकायत भेज दी है

    इस मामले पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए चुनाव आयोग को लिखित शिकायत भेज दी है और बीडीओ जितेंद्र कुमार के खिलाफ निलंबन की अनुशंसा की गई है. जिला अधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने पुष्टि करते हुए कहा कि, इस संवेदनशील समय में एक जिम्मेदार अधिकारी का इस तरह लापता हो जाना प्रशासनिक जिम्मेदारी से भागने जैसा है, जो न केवल चुनावी कार्य को बाधित करता है बल्कि जन-विश्वास के साथ भी धोखा है.

    प्रशासन ने अपनाया कड़ा रुख 

    बता दें कि बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एसआईआर के तहत मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण कार्य जोरों पर है.इसी क्रम में जब गोपालगंज जिला प्रशासन ने एसआईआर की प्रक्रिया शुरू की और बीडीओ से समन्वय साधना चाहा, तो वह अनुपस्थित पाए गए. लगातार संपर्क नहीं होने के बाद उनकी गैरहाजिरी ने प्रशासन को सतर्क कर दिया.बीडीओ के लापता होने के बाद प्रशासन ने त्वरित कदम उठाते हुए सदर अंचल पदाधिकारी रजत कुमार बरनवाल को बीडीओ का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है.वर्तमान में उन्हीं के पर्यवेक्षण में एसआईआर की प्रक्रिया जारी है.

    लापता होने को लेकर कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है

    हालांकि अब तक बीडीओ के लापता होने को लेकर कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है, लेकिन डीएम ने स्पष्ट कर दिया है कि यह सिर्फ विभागीय लापरवाही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जिम्मेदारी से भी सीधा खिलवाड़ है. ऐसे में उनके विरुद्ध सख्त प्रशासनिक कार्रवाई तय मानी जा रही है.इस पूरे प्रकरण ने विपक्ष को सरकार और प्रशासन पर हमला करने का मौका दे दिया है.पहले से ही एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले विपक्षी दल अब इसे लेकर प्रशासन की “नीयत” और “योग्यता” पर भी सवाल उठा रहे है.अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग पर टिकी हैं कि वह लापता अधिकारी को लेकर क्या रुख अपनाता है साथ ही यह मामला राज्यभर के उन अफसरों के लिए भी चेतावनी बन सकता है, जो चुनावी जिम्मेदारियों को गंभीरता से नहीं ले रहे है.यह मामला न केवल एक लापता अधिकारी की खबर है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों की पारदर्शिता और तैयारी को लेकर एक गंभीर चेतावनी भी है.


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