बिहार की सड़कों की बदलेगी सूरत: मोकामा-मुंगेर एक्सप्रेसवे समेत 4 बड़े प्रोजेक्ट्स पर सचिव का बड़ा फैसला

    बिहार की सड़कों की बदलेगी सूरत: मोकामा-मुंगेर एक्सप्रेसवे समेत 4 बड़े प्रोजेक्ट्स पर सचिव का बड़ा फैसला

    पटना : बिहार में नीतीश सरकार के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के विजन को गति देने के लिए पथ निर्माण विभाग एक्शन मोड में है। विभाग के सचिव श्री पंकज कुमार पाल ने आज पटना स्थित विभागीय सभागार में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की. इस बैठक में राज्य की चार प्रमुख सड़क परियोजनाओं की बारीकी से समीक्षा की गई, जो आने वाले समय में बिहार की रफ्तार और कनेक्टिविटी को नई दिशा देंगी.

    बैठक का मुख्य केंद्र मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, सिवान-मशरख परियोजना, बकरपुर-मानिकपुर और महेंशखूंट-सहरसा-पूर्णिया सड़क परियोजनाएं रहीं. सचिव ने स्पष्ट किया कि विभाग इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

    1. मोकामा-मुंगेर एक्सप्रेसवे: 4447 करोड़ से संवरेगा चार जिलों का सफर

    बैठक में सबसे महत्वपूर्ण चर्चा : फोरलेन मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवेको लेकर हुई। 82.4 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की कुल लागत लगभग 4447 करोड़ रुपये है. यह एक्सप्रेसवे पटना के मोकामा से शुरू होकर लखीसराय, शेखपुरा और मुंगेर जिलों को जोड़ेगा.

    वर्तमान स्थिति: सचिव पंकज कुमार पाल ने भूमि अधिग्रहण में आ रही रुकावटों को तत्काल दूर करने का निर्देश दिया.

    फायदा: इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण से मुंगेर और भागलपुर क्षेत्र की पटना से दूरी कम हो जाएगी और व्यापारिक गतिविधियों को नई ऊंचाई मिलेगी.

     

    2. पटना-बेतिया हाई स्पीड कॉरिडोर का अहम हिस्सा: बकरपुर-मानिकपुर रोड

    बकरपुर-मानिकपुर सड़क परियोजना की समीक्षा के दौरान यह बताया गया कि इस प्रोजेक्ट की प्रगति संतोषजनक है.

    लंबाई और लागत:38.81 किलोमीटर लंबी यह सड़क लगभग 1422 करोड़ रुपये की लागत से बन रही है.

     

    अहमियत: यह परियोजना 'पटना-बेतिया हाई स्पीड कॉरिडोर' का एक अभिन्न अंग है। सचिव ने संबंधित जिलाधिकारियों से फोन पर बात कर भू-अर्जन की बाधाओं को दूर करने का निर्देश दिया ताकि काम की रफ्तार कम न हो.

    3. सिवान-मशरख परियोजना:    क्षेत्रीयकनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा

    सिवान और सारण जिले के लोगों के लिए अच्छी खबर है। सिवान-मशरख परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई.

     यह परियोजना सिवान में 44.5 किलोमीटर और सारण जिले में 5.6 किलोमीटर की लंबाई तय करेगी.

    इसकी कुल लागत लगभग 1399 करोड़ रुपये है। यह सड़क क्षेत्रीय आवागमन को सुगम बनाएगी और ग्रामीण इलाकों को मुख्य शहरों से जोड़ेगी.

    4. महेंशखूंट-सहरसा-पूर्णिया सड़क: अप्रैल तक काम पूरा करने का लक्ष्य

    कोसी और सीमांचल क्षेत्र के लिए जीवनरेखा मानी जाने वाली महेंशखूंट-सहरसा-पूर्णिया सड़क परियोजना अपने अंतिम चरण में

    प्रगति: इस 2-लेन उन्नयन परियोजना का 91 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है.

    डेडलाइन: सचिव ने शेष बचे 9 प्रतिशत काम को अप्रैल 2026 तक हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भू-अर्जन की छोटी-मोटी समस्याओं को तुरंत सुलझा लिया जाए.

    अफसरों और NHAI को सख्त निर्देश

    समीक्षा बैठक के अंत में सचिव पंकज कुमार पाल ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण में भूमि अधिग्रहण सबसे बड़ी बाधा बनती है, इसलिए जिलाधिकारियों के साथ मिलकर इसका त्वरित समाधान निकाला जाए.

    सचिव का स्पष्ट निर्देश

    "बिहार सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के किसी भी कोने से पटना पहुँचने में कम से कम समय लगे। इन परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और व्यापार को भी भारी बढ़ावा मिलेगा."

    इस बैठक में पथ निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ एनएचएआई के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। यह स्पष्ट है कि यदि ये चार परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो बिहार का सड़क नेटवर्क देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में मजबूती से खड़ा होगा.


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