BIHAR:सचिन पायलट ने पटना में प्रदेश अध्यक्ष को बैठा चलाई कार तो क्या निकला सियासी मतलब, पढ़िए

    BIHAR:सचिन पायलट ने पटना में प्रदेश अध्यक्ष को बैठा चलाई कार तो क्या निकला सियासी मतलब, पढ़िए

    पटना (PATNA):  पटना में शुक्रवार को कांग्रेस ने फिर एक बार राजद  को कुछ संदेश देने की कोशिश की . यह  संदेश कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने दी है.  सचिन पायलट खुद ड्राइविंग करते दिखे.  उनके बगल में नवनियुक्त कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार  आगे वाली सीट पर बैठे हुए थे. शुक्रवार को  कन्हैया कुमार की पदयात्रा का समापन था.  प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने के बाद होटल की पार्किंग में सचिन पायलट ने गाड़ी के ड्राइवर को हटाकर खुद ड्राइविंग सीट पर बैठ गए.   अपने बगल में प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार  को बैठा लिया.  इसके बाद तो सियासी मतलब निकाले  जाने लगे.  यह भी मतलब निकाला  गया कि कांग्रेस बिहार में ड्राइविंग सीट पर रहेगी यानी पीछे-पीछे नहीं चलेगी.

    सचिन पायलट के बयान से खड़ा हुआ है विवाद 
     
     बल्कि फ्रंट फुट पर खेलेगी.  यह  संदेश  राष्ट्रीय जनता दल को देने की कोशिश की गई है.  क्योंकि महागठबंधन में  सीएम  फेस को लेकर अभी तक कांग्रेस ने किसी पर भरोसा नहीं किया है.  वैसे,शुक्रवार की  प्रेस कॉन्फ्रेंस में सचिन पायलट ने कहा कि हमारा गठबंधन है.  पहले चुनाव लड़ा जाएगा.  महागठबंधन को अगर बहुमत मिलेगा, उसके बाद तय होगा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा.  हालांकि राजद  की ओर से इस पर तुरंत  प्रतिक्रिया आई  कि तेजस्वी यादव के नाम पर कोई गलतफहमी नहीं है.  राजद  बिहार में बड़ी पार्टी है, इसलिए नेता तेजस्वी यादव ही होंगे.   शुक्रवार के बाद शनिवार को भी महागठबंधन में नेता को लेकर किच -किच  सुनाई दी.  

    अखिलेश सिंह के बयान से कांग्रेस की कलह आई सामने 

    शुक्रवार को  कन्हैया कुमार की पदयात्रा के समापन में आए सचिन पायलट ने बयान देकर इस मुद्दे को भड़का दिया था. उन्होंने कहा था कि चुनाव के बाद सीएम  फेस को तय किया जाएगा.  बिहार के कांग्रेस प्रभारी भी तेजस्वी के नाम को हरी झंडी नहीं दे रहे है.  जबकि राजद  तेजस्वी के अलावा कोई समझौता करने को तैयार नहीं है.  इसबीच पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अखिलेश सिंह ने एक ऐसा बयान दिया, जिससे  कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही कलह  सामने आ गई.  अखिलेश सिंह ने राजद  के स्टैंड का सपोर्ट किया है.  कहा कि जिनको बिहार की राजनीति समझ में नहीं आती, वह इस तरह की बातें  करते है.  कांग्रेस अकेले बिहार में चुनाव कैसे लड़ सकती है? भाजपा जैसी बड़ी पार्टी भी जब बिहार में गठबंधन के साथ चुनाव लड़ती है तो कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ने में क्या सक्षम हो सकती है?

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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