बिहार: गुलज़ारबाग़ प्रिंटिंग प्रेस के दुर्लभ दस्तावेजों का होगा डिजिटलीकरण

    बिहार: गुलज़ारबाग़ प्रिंटिंग प्रेस के दुर्लभ दस्तावेजों का होगा डिजिटलीकरण

    पटना(PATNA)बिहार सरकार ने राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है. मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत और बिहार संग्रहालय के महानिदेशक श्री अंजनी कुमार सिंह ने पटना के ऐतिहासिक गुलज़ारबाग़ स्थित प्रिंटिंग प्रेस एवं अभिलेखागार का संयुक्त निरीक्षण किया. यह निरीक्षण भारत सरकार की महत्वाकांक्षी “ज्ञान भारतम” पहल के अंतर्गत दुर्लभ दस्तावेजों के डिजिटलीकरण पर केंद्रित था, जिसका उद्देश्य इन अमूल्य धरोहरों को नष्ट होने से बचाना और भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुलभ बनाना है.

    निरीक्षण का विस्तृत विवरण

    निरीक्षण के दौरान दोनों उच्चाधिकारियों ने अभिलेखागार में संरक्षित पुरानी फाइलों, दुर्लभ पांडुलिपियों और ब्रिटिश कालीन दस्तावेजों का गहन अवलोकन किया. ये दस्तावेज बिहार की प्रशासनिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के अभिन्न अंग हैं, जो सदियों पुरानी घटनाओं, नीतियों और सांस्कृतिक विकास की कहानी बयां करते हैं. मुख्य सचिव श्री अमृत ने इन दस्तावेजों को जीर्ण-शीर्ण अवस्था से बचाने के लिए आधुनिक तकनीकों के माध्यम से डिजिटलीकरण करने के निर्देश दिए. उन्होंने जोर दिया कि डिजिटलीकरण न केवल इन दस्तावेजों को सुरक्षित रखेगा, बल्कि शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और आम जनता के लिए ऑनलाइन पहुंच को आसान बनाएगा. इससे वैश्विक स्तर पर बिहार के इतिहास का अध्ययन संभव हो सकेगा.

    प्रिंटिंग प्रेस परिसर की व्यवस्थाओं का भी विस्तृत जायजा लिया गया. अधिकारियों को वैज्ञानिक विधियों का उपयोग करने के निर्देश दिए गए, जैसे कि उचित तापमान नियंत्रण, नमी-प्रतिरोधी भंडारण और विशेष रसायनों से कागज की गुणवत्ता तथा स्याही को लंबे समय तक संरक्षित रखना. गुलज़ारबाग़ प्रेस, जो बिहार के राजपत्र प्रकाशन का प्रमुख केंद्र रहा है, अब डिजिटल युग में प्रवेश करने जा रहा है. यह प्रेस ब्रिटिश काल से ही महत्वपूर्ण रहा है, जहां से सरकारी अधिसूचनाएं और ऐतिहासिक दस्तावेज छपते आए हैं.

    अधिकारियों ने क्या कुछ कहा

    मौके पर उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत ने कहा, “बिहार का इतिहास अत्यंत गौरवशाली है. गुलज़ारबाग़ प्रेस में मौजूद दस्तावेज इसके मूक गवाह हैं. ‘ज्ञान भारतम’ पहल के माध्यम से हम इस ज्ञान संपदा को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करेंगे. यह न केवल संरक्षण है, बल्कि डिजिटल माध्यम से ज्ञान के प्रसार का माध्यम भी बनेगा.” उन्होंने आगे कहा कि ऐसे प्रयास बिहार को सांस्कृतिक रूप से मजबूत बनाएंगे और पर्यटन तथा शिक्षा क्षेत्र में योगदान देंगे.

    वहीं, महानिदेशक श्री अंजनी कुमार सिंह ने  भरोसा दिलाया कि  बिहार संग्रहालय इस कार्य में तकनीकी और विशेषज्ञ सहायता प्रदान करेगा. उन्होंने कहा, “हम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप दस्तावेजों का संरक्षण सुनिश्चित करेंगे. इससे न केवल स्थानीय शोधकर्ताओं को लाभ होगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर बिहार की विरासत को मान्यता मिलेगी.” सिंह ने जोर दिया कि डिजिटलीकरण से दस्तावेजों की प्रतियां सुरक्षित रहेंगी, भले ही मूल प्रतियां प्रभावित हों.

    इस अवसर पर कौन-कौन  रहे मौजूद

    इस अवसर पर वित्त विभाग की सचिव (व्यय) श्रीमती रचना पाटिल भी मौजूद रहीं, जिन्होंने इस पहल के लिए आवश्यक बजटीय समर्थन पर चर्चा की. यह प्रयास बिहार की ऐतिहासिक धरोहर को डिजिटल युग में जीवंत रखेगा, शोध कार्यों को प्रोत्साहित करेगा और सांस्कृतिक संरक्षण को मजबूत बनाएगा. “ज्ञान भारतम” जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों से राज्य स्तर पर ऐसे अभिलेखागारों का विकास होगा, जो देश की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करेंगे.

    गुलज़ारबाग़ प्रेस का डिजिटलीकरण न केवल एक तकनीकी उन्नयन है, बल्कि बिहार के गौरवशाली अतीत को वर्तमान और भविष्य से जोड़ने का पुल भी है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे इतिहास के अनछुए पहलुओं पर नई रोशनी पड़ेगी, और युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ सकेगी. बिहार सरकार की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन सकती है.


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