लीची केले के बाद अब बिहारी सेव खाने को हो जायें तैयार , नालंदा के किसानों ने कर दिया कमाल

    लीची केले के बाद अब बिहारी सेव खाने को हो जायें तैयार , नालंदा के किसानों ने कर दिया कमाल

    नालंदा(NALANDA): वैसे तो बिहार के हाजीपुर के केले और मुजफ्फरपुर की लीची का ही स्वाद देश –विदेशों में प्रसिद्ध था. लेकिन जल्दी ही बिहार के सेब भी लोगों को खाने को मिलेंगे. अब तक हम यही जानते आए हैं कि सेब ठंडे प्रदेशों में होता है.  जैसे कि हिमाचल प्रदेश या कश्मीर में इसकी फार्मिंग होती है. लेकिन  अब बिहार के किसानो ने भी सेब की खेती करनी शुरू कर दी है. जिस लाल-लाल सेब को देखकर आप ललचने लगते हैं. और खाने के लिए बैचेन हो जाते हैं. वो सेब अब हमारे बिहार के नालंदा में ही फलेंगे. इसकी छोटी सी शुरुआत भी कर दी गई है. जो सफल रहा है. इसके बाद अन्य किसान भी इसको करने के लिए आयेंगे.

    बिहार में फल रहे है हिमाचल प्रदेश और कश्मीर के सेब

    बिहार के नालंदा में सेब की खेती की शुरुआत की गई है. सोहडीह निवासी अनिल कुमार ने 1 एकड़ में हरिमन-99 प्रजाति के सेब के 400 पौधें लगाये हैं. जिसमें 200 पेड़ में फल लगना शुरू हो गया है. अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहा तो जिले वासियों को हिमाचल और कश्मीर के सेब जैसी क्वालिटी और सस्ते दाम पर उपलब्ध नालंदा में ही होगी. इतना ही नहीं सेब को पूरी तरह से जैविक फसल के रूप में उत्पादन करने की तैयारी चल रही है. इसके लिए पर्याप्त मात्रा में जैविक खाद तैयार किया गया है.

    6 एकड़ में उद्यानिक फसल लगाने की तैयारी की जा रही है

    सेव की खेती करने की शुरुआत करनेवाले अनिल कुमार ने बताया कि 6 एकड़ में उद्यानिक फसल लगाने की तैयारी की जा रही है. जिसमें एक एकड़ में सिर्फ सेब के ही पौधे लगाए गए हैं. करीब 200 पौधों पर ट्रायल किया जा रहा है. सफल होने के बाद सेव की खेती का और विस्तार किया जाएगा. उद्यानिक फसल लगाने के साथ-साथ इस जगह को फार्म हाउस के रूप में भी डेवल्प किया जा रहा है. सिंचाई के लिए उद्यान विभाग के सहयोग से ड्रिप सिस्टम लगाया गया है. इसके बाद मल्चर लगाने की तैयारी चल रही है. ताकि खर-पतवार की समस्या से निजात मिल सके.

    हरिमन-99 प्रजाति के सेब के जिन 200 पौधा पर ट्रायल चल रहा है

    आपको बताये कि हरिमन-99 प्रजाति के सेब के जिन 200 पौधा पर ट्रायल चल रहा है. उसको हिमाचल प्रदेश से मंगाया गया है. कुल पौधों की कीमत 2 लाख रुपए है. अनिल कुमार ने बताया कि बिहार के किसान सब्जी की खेती ज्यादातर करते आ रहे हैं. शुरु से खेती  रुची होने की वजह से केती में ही कुछ अलग करने का सोचा. और सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी इकट्ठा करके इसकी शुरुआत की.

    45-48 डिग्री तापमान पर तैयार हो जाता है सेब

    सेव के हरिमन 99 प्रजाति का ईजाद हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हरिमन प्रसाद ने किया था. जिसकी वजह से इसका नाम भी उनके नाम पर रखा गया है. जब उन्होंने इसमे सफलता हासिल कर ली तो गर्म प्रदेशों में भी इसके उपज के बारे में बताया. यह प्रजाति गर्म प्रदेशों के लिए ही तैयार की गई है. यह 45-48 डिग्री तापमान पर तैयार हो जाता है. और करीब ढ़ाई साल में ही पौधा फल देने लगता है. सबसे बड़ी बात है कि जून-जुलाई माह में फल तैयार हो जाता है. फल तैयार होने के बाद इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है.  फल को सुरक्षित रखने के लिए पैक हाउस भी तैयार किया जा रहा है.

    खेती में रुची रहने की वजह से अनिल कुमार ने की नई शुरुआत

    अनिल कुमार ने बताया कि किसी भी फसल का उत्पादन के लिए जानकारी सबसे अधिक जरूरी है. जानकारी के अभाव में ही किसान कुछ नया करने से पीछे हट जाते हैं. उनके मन में नुकसान होने का डर बना रहता है. कीटनाशक की दुकान से सफर शुरू किया था. और आज उद्यानिक फसल की ओर अपना कदम बढ़ा रहे हैं. पूरी उम्मीद है कि सफलता मिलेगी.

    में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 7 जिलों में सेब की खेती की योजना शुरू की थी

    आपको बता दे कि कृषि विभाग ने राज्य में सेब की खेती की संभावना को देखते हुए साल 2022 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 7 जिलों में सेब की खेती की योजना शुरू की थी. जिसमें बेगूसराय, भागलपुर मुजफ्फरपुर, औरंगाबाद, वैशाली, कटिहार और समस्तीपुर के कुछ किसान अपने स्तर से सेब की खेती कर रहे हैं. अब नालंदा के किसान भी सेब की खेती करने लगे हैं.


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