ओबीसी बेटा को ओबीसी की गणना से परेशानी क्यों? जातीय जनगणना के सवाल पर बगले क्यों झांकने लगते हैं पीएम मोदी, सीताराम येचुरी ने खेला ओबीसी कार्ड

    ओबीसी बेटा को ओबीसी की गणना से परेशानी क्यों? जातीय जनगणना के सवाल पर बगले क्यों झांकने लगते हैं पीएम मोदी, सीताराम येचुरी ने खेला ओबीसी कार्ड

    पटना(PATNA): देखने वाले देखते रह जायेंगे और इंडिया गठबंधन कमाल कर जायेगा. पटना की जमीन पर कदम रखते ही यह दावा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राष्ट्रीय महासचिव सीताराम येचुरी की ओर से आया है.

    ईडी सीबीआई  के छापे पर सवाल उठाते हुए येचुरी ने कहा कि यदि कोई भ्रष्ट है, भ्रष्टाचार किया है तो किसी को भी कार्रवाई से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन यहां सवाल यह है कि हर चुनाव के पहले विपक्ष दलों के नेताओं पर भी यह कार्रवाई क्यों होती है, और वही आरोपी जब भाजपा में शामिल हो जाता है तो भ्रष्टाचार का वह मामला छू मंतर क्यों हो जाता है.

    ईडी का सक्सेस रेट इतना कम क्यों?

    सीताराम येचुरी ने सवाल खड़े करते हुए पूछा कि यदि हर दिन भ्रष्टाचारियों की ही गिरफ्तारी हो रही है, रोज छापे मारे जा रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके ईडी का सक्सेस रेट महज 0.1 फीसदी क्यों हैं?

    येचुरी ने इस बात का दावा किया कि ईडी के ये आंकड़ें ही इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि  सिर्फ राजनीतिक साजिश के तहत विपक्षी दलों को निशाना बनाया जा रहा है. मोदी सरकार में अब तक पांच हजार से ज्यादा लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है, लेकिन कार्रवाई महज 23 के विरुद्ध हो रही है, तब क्या यह माना जाय कि बाकि लोगों का सरकार के साथ सेटिंग हो गया.

    जातीय जनगणना से क्यों भाग रही है भाजपा

    वहीं जातीय जनगणना की मांग को एक बार फिर से उठाते हुए येचुरी ने पूछा कि आखिर भाजपा को इससे परेशानी क्या है, वह क्यों जातीय जनगणना से पीछे भागने की कोशिश कर रही है, जबकि इन आंकड़ों का इस्तेमाल कर ही वंचित सामाजिक समूहों के लिए नीतियों का निर्माण किया जा सकता है.

    ओबीसी बेटा को ओबीसी गणना से परेशानी क्यों?

    एक तरफ पीएम पीएम मोदी अपने आप को ओबीसी का बेटा बताते हैं, दूसरी तरफ जब उनकी राजनीतिक सामाजिक भागीदारी का सवाल आता है तो नजर चुराने लगते हैं. येचुरी ने इस बात का भी दावा किया कि 2024 का लोकसभा चुनाव महज मोदी हटाने का चुनाव नहीं है, असली सवाल इस देश के लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थानों को बचाने का है, जिसकी बुनियाद एक-एक कर ध्वस्त की जा रही है, और देश की सारी सत्ता महज दो हाथों में सौंपी जा रही है, यह स्थिति आने वाले दिनों में बड़ा संकट पैदा कर सकता है, हमें सोचना होगा कि यदि पीएम मोदी 2024 के बाद वापस आ जाते हैं तो देश में लोकतंत्र सुरक्षित रहेगा या भी नहीं.


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