क्या IAS छवि रंजन को दिखने लगा था अपने शानदार कैरियर का अंत, आखिर प्राइवेट सेक्टर में क्यों तलाश रहे थें अपना भविष्य

    क्या IAS छवि रंजन को दिखने लगा था अपने शानदार कैरियर का अंत, आखिर प्राइवेट सेक्टर में क्यों तलाश रहे थें अपना भविष्य

    रांची(RANCHI)-क्या सेना जमीन घोटाले में ईडी के हत्थे चढ़ चुके छवि रंजन को इस बात का आभास हो गया था कि अब किसी भी पल उनकी गिरफ्तारी हो सकती है, और इसके साथ ही एक आईएएस के रुप में उनके शानदार कैरियर का दुखद: अंत बेहद करीबन खड़ा है. क्या सेना जमीन घोटाले में ईडी की दस्तक के बाद उन्हे इस बात का पूरजोर विश्वास हो गया था कि अब यह मामला दबने वाला नहीं है और ईडी झाड़ पोंछ कर इसकी सारी परतों को एक के बाद एक बाहर लाकर ही रुकेगी? क्या यही कारण है कि ईडी की छापेमारी के पहले ही उनके द्वारा इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं को समटते हुए एक प्रश्नोतरी तैयार कर उसका जवाब तलाशने की कोशिश की जा रही थी. क्या इन सभी सवालों का जवाब हां में दिया जा सकता है?

     सेना जमीन घोटाले में ईडी की इंट्री से बेहद परेशान थे छवि रंजन

     हालांकि इस बार में कुछ भी दावे के साथ नहीं कहा जा सकता, लेकिन सूत्रों की माने तो छवि रंजन को इस बात का आभास हो गया था कि जमीन घोटाले मामले में ईडी की इंट्री के बाद अब कोई बचने वाला नहीं है, और आज नहीं तो कल इस मामले में सलंग्न सभी आरोपियों के दरवाजे पर ईडी की दस्तक होने वाली है.

    प्राइवेट सेक्टर में नौकरी की तलाश

    दावा किया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से छवि रंजन प्राइवेट सेक्टर में अपने लिए बेहतर अवसर की तलाश में थें. देश विदेश की कई नामचीन कंपनियों से सम्पर्क साधा जा रहा था. अपने ओहदे के अनुरुप उन्हे एक बेहतर अवसर की तलाश थी. हालांकि दूसरी तरफ उनकी सोच खुद का फार्म भी खड़ा करने की थी, ताकि वह अपनी उर्जा, संवाद कुशलता और राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल कर अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकें.

    कल्याण विभाग के निदेशक पद से खुश नहीं थे छवि रंजन

    जबकि कुछ लोगों का दावा यह भी है कि सरकार ने जिस तरीके से उन्हे कल्याण विभाग के निदेशक के पद पर बैठा दिया था, उससे वह खुश नहीं थें. कल्याण विभाग में उनका मन नहीं लगा रहा था, उनकी कोशिश जिले में तैनाती की थी, उनकी पहली पसंद डीसी जमशेदपुर के रुप में तैनाती थी, उपर तक इसकी सेंटिंग हो गयी थी, लेकिन सेना जमीन घोटाले में बार-बार अखबारों में उनके नाम की बनती सुर्खियां इसमें बाधा बन रही थी.


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