वन नेशन वन इलेक्शन की बात करने वालों का जातीय जनगणना पर चुप्पी! सीएम नीतीश की घोषणा गांधी जयंती से इंडिया एलाइंस के कार्यक्रमों की शुरुआत

    वन नेशन वन इलेक्शन की बात करने वालों का जातीय जनगणना पर चुप्पी! सीएम नीतीश की घोषणा गांधी जयंती से इंडिया एलाइंस के कार्यक्रमों की शुरुआत

    पटना(PATNA)इंडिया एलाइंस की मुम्बई बैठक के बाद पटना लौटे नीतीश कुमार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर से पूरे देश में कार्यक्रमों की शुरुआत किये जाने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि गठबंधन अन्दर सीट शेयरिंग कोई समस्या नहीं है, करीबन-करीबन वैचारिक सहमति बन चुकी है और इसी महीने इसकी घोषणा भी कर दी जायेगी.

    सीएम नीतीश ने कहा कि मुम्बई की बैठक बेहद सफल रही, कार्यक्रमों का सफल संचालन के लिए पांच कमेटियों का निर्माण कर दिया गया है, सब कुछ सुचारु तरीके से चल रहा है. मोदी सरकार पर हमलावर नीतीश ने कहा कि जो विधान सभा और लोक सभा का चुनाव एक साथ करवाने की बात करते हैं, वह जातीय जनगणना पर चुप्पी साध जाते हैं, आखिर जातीय जनगणना से उन्हे परहेज क्यों है, जबकि आज पूरे देश से जातीय जनगणना की मांग सामने आ रही है, और खासकर पिछड़ी जातियों के द्वारा इसकी मांग प्रमुखता से की जा रही है, प्रधानमंत्री मोदी को जातीय जनगणना से पीछे हटने के कारणों का खुलासा करना चाहिए. सीएम नीतीश ने कहा कि केन्द्र की ओर से अभी और भी कई फैसले सामने आयेंगे, क्योंकि जैसे जैसे गठबंधन को मजबूती मिल रही है, उनकी बेचैनी बढ़ती जा रही है, उनका अपना जनाधारा बिखरता नजर आने लगा है. उनके बयानों से उनकी बौखलाहट साफ दिखलाई पड़ने लगी है.

     वन नेशन वन इलेक्शन पर तेजस्वी का तंज

    दूसरी तरह वन नेशन पर तेजस्वी यादव का भी तंज सामने आ चुका है. मुम्बई बैठक से वापस लौटते ही जब तेजस्वी के सामने यह सवाल उछाला गया तो कुछ कुछ लालू की स्टाइल में तेजस्वी ने कहा कि यह मोदी सरकार का एक नया जुमला है, आज यह वन नेशन वन इलेक्शन की बात कह रहे हैं, कल ये वन नेशन वन रीलिजन की बात करेंगे, परसों वन नेशन वन लीडर की बात करेंगे, और तीसरे दिन वन नेशन वन लैंग्वेज की बात करने लगेंगे, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत विविधताओं से भरा देश हैं, यहां कोई भी बात पूरे देश के लिए उसी रुप में लागू नहीं हो सकती. यह हमारी बहुलतावादी सोच पर एक हमला है, यदि बात ही करना है तो वन नेशन वन इनकम की बात क्यों नहीं करतें.

    मोदी सरकार के आने बाद बदतर हुई गरीबों की स्थिति, नून रोटी का संकट बड़ा सवाल

    पिछले 10 वर्षों में जिस प्रकार से समाज के वंचित तबकों की गरीबी में बेहिसाब इजाफा हुआ है, उनके सामने नून रोटी का संकट आ खड़ा हुआ है, जबकि दूसरी ओर चुनिंदा उद्योगपतियों की संपत्ति में हजार गुना की वृद्धि दर्ज की गयी है, अमीर गरीब की इस बढ़ती खाई के लिए मोदी सरकार के पास क्या उपचार है. वह वन नेशन वन इनकम पर काम क्यों नहीं करना चाहती, गरीबों की आय में वृद्धि करने का प्रोगाम सामने क्यों नहीं लाती. आज का बड़ा सवाल यह है कि सबका साथ सबका विकास के नारे से शुरु हुई यह यात्रा अपने चुनिंदा दोस्तों के विकास में क्यों सिमट गया.

    2024 में विदाई तय

    तेजस्वी ने कहा कि जिस प्रकार से भाजपा को बिहार में सबक सिखाया है, अब वही सिख उसे केन्द्र की राजनीति में देंगे, लालू यादव का प्रयास रंग लाया है, राहुल गांधी ने मोहब्बत की राजनीति की शुरुआत कर दी है, अब नफरत की राजनीति का दौर समाप्त होने वाला है. 2024 में इंडिया की सरकार बनेगी और इस सरकार की विदाई होगी.


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