नगर की सरकार, रांची-धनबाद में कैसी है मेयर पद की जंग, जानिए कौन किसपर है भारी

    नगर की सरकार, रांची-धनबाद में कैसी है मेयर पद की जंग, जानिए कौन किसपर है भारी

    रांची(RANCHI): झारखंड में नगर निकाय चुनाव 2026 को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है. नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही अब उम्मीदवारों को उनके चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए गए. चुनाव चिन्ह मिलने के बाद शहर में प्रचार प्रसार तेज हो गया. इस  बार चर्चा सिर्फ वादों की नहीं, बल्कि उन चुनाव चिन्हों की है. इस बार बिस्किट से लेकर अलमिरा और बेबी वाकर प्रत्याशी को चिन्ह मिले है. ऐसे में आज बात चुनाव चिन्ह के साथ प्रत्याशी की करेंगे.   झारखंड के दो अहम शहर राजधानी रांची और कोयला नगरी धनबाद में कैसा है चुनावी माहौल.  मेयर पद के  मुकाबले में  कौन मारेगा बाजी.

    रांची: मेयर पद के लिए त्रिकोणीय मुकाबला

    राजधानी रांची में इस बार मेयर पद के लिए सीधा त्रिकोणीय संघर्ष देखने को मिल रहा है. तीन प्रमुख राजनीतिक दलों के समर्थित उम्मीदवार मैदान में हैं . सभी मतदाताओं को लुभाने में जुट गए  हैं. भाजपा समर्थित उम्मीदवार रोशनी खलखो को बिस्किट चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है. भाजपा के मजबूत संगठन और कैडर का समर्थन उन्हें चुनावी मैदान में मजबूती देता दिख रहा है. रोशनी खलखो अपने प्रचार में महिला सशक्तिकरण, पेयजल संकट, स्वच्छता और बुनियादी नागरिक सुविधाओं को प्रमुख मुद्दा बना रही हैं. उनका दावा है कि वे सीधे जनता से जुड़ी नेता हैं और बिस्किट की मिठास की तरह विकास को हर घर तक पहुंचाना उनका लक्ष्य है. वहीं कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार रमा खलखो को बेंच चुनाव चिन्ह मिला है. रमा खलखो राजनीति में लंबे अनुभव के साथ मैदान में उतरी हैं. उनका कहना है कि किसी बड़े शहर को चलाने के लिए सिर्फ जोश नहीं, बल्कि अनुभव और प्रशासनिक समझ भी जरूरी होती है. कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक, शहरी मध्यम वर्ग और अल्पसंख्यक मतदाता उनकी चुनावी ताकत माने जा रहे हैं. झारखंड मुक्ति मोर्चा समर्थित उम्मीदवार सुजीत विजय आनंद कुजूर को ईंट चुनाव चिन्ह दिया गया है. वे  झामुमो के सांगठनिक नेटवर्क के सहारे चुनावी मैदान में हैं. युवाओं और आदिवासी समाज को जोड़ना उनका मुख्य लक्ष्य है. सुजीत कुजूर का कहना है कि “ईंट” के प्रतीक के साथ वे रांची के विकास की एक नई नींव रखने जा रहे हैं.

    धनबाद में  त्रिकोणीय संघर्ष

    कोयला नगरी धनबाद में मेयर की सीट इस बार चुनाव की सबसे हॉट सीट बन गई है. नामांकन के अंतिम दिन झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह के मैदान में उतरने से पूरा राजनीतिक समीकरण बदल गया. उनका चुनाव चिन्ह ऊन व सिलाई है और उन्होंने खुद को किसी दल से नहीं, बल्कि सीधे जनता से जुड़ा उम्मीदवार बताया है. संजीव सिंह के सामने भाजपा समर्थित उम्मीदवार संजीव अग्रवाल हैं,  जिन्हें हरी मिर्च चुनाव चिन्ह मिला है. भाजपा का संगठन और शहरी वोट बैंक उनके पक्ष में माना जा रहा है. वहीं तीसरे उम्मीदवार शेखर अग्रवाल बिस्किट चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में डटे हुए हैं. धनबाद में मुकाबला अब पूरी तरह त्रिकोणीय हो चुका है, जहाँ एक तरफ पार्टी की ताकत है, तो दूसरी तरफ व्यक्तिगत प्रभाव और सामाजिक पकड़.

    जनता की नजरें, असली फैसला मतदान में

    रांची और धनबाद दोनों शहरों में मतदाताओं के लिए चुनाव चिन्ह अब सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि उम्मीदों के प्रतीक बन चुके हैं. लोग सवाल कर रहे हैं—क्या इस बार ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी? क्या साफ पानी, बेहतर पार्क और मजबूत नागरिक सुविधाएं मिलेंगी कुल मिलाकर, रांची में त्रिकोणीय टक्कर और धनबाद में वर्चस्व की जंग इस नगर निकाय चुनाव को बेहद अहम बना रही है. यह चुनाव सिर्फ मेयर या पार्षद चुनने का नहीं, बल्कि शहरी जनता के भरोसे और उम्मीदों की परीक्षा जिसका फैसला अब सीधे मतदान के जरिए होगा.


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