कुकियों के समर्थन में मिजोरम में भारी रैली, सीएम बीरेन सिंह ने लगाया आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप

    कुकियों के समर्थन में मिजोरम में भारी रैली, सीएम बीरेन सिंह ने लगाया आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK)- मणिपुर की हिंसा की तपीश अब उसके पड़ोसी राज्यों में भी महसूस की जाने लगी है, मणिपुर की हिंसा के बाद अब तक करीबन 13 हजार लोग पड़ोसी राज्य मिजोरम में शरण ले चुके हैं, इस बीच मिजोरम में कुकियों के समर्थन में रैली का आयोजन किया गया, कुकियों के समर्थन में निकाली गई इस रैली में मिरोजम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा सहित करीब पचास हजार लोगों ने भाग लिया. कुकियों के समर्थन में निकाली गयी इस रैली पर मणिपुर सीएम बीरेन सिंह ने गहरी आपत्ति दर्ज की है, उन्होंने इसे अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया है.

    कुकियों की तरह मिजो भी एक जनजाति है

    ध्यान रहे कि कुकियों तरह ही मिजो भी एक अनुसूचित जनजाति हैं, और दोनों के बीच काफी अच्छे रिश्ते रहे हैं, रीति रिवाज और संस्कृति के पैमाने पर भी दोनों की बीच काफी समानता है, यही कारण है कि इस हिंसा फैलने के बाद बड़ी संख्या में कुकियों ने मिजोरम की ओर रुख किया. जबकि मैतेई लोगों को इस हिंसा के बाद मिजोरम छोड़ना पड़ा, अब इस हिंसा को लेकर दोनों राज्य के मुख्यमंत्रिंयों के बीच टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है.

    मणिपुर हिंसा को ड्रग कार्टेल के खिलाफ लड़ाई बताने की कोशिश कर रही है भाजपा  

    जहां मिरोजम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा कुकियों के समर्थन में खड़े दिख रहे हैं, वहीं मणिपुर से सीएम बीरेन सिंह इस हिंसा की वजह ड्रग कार्टेल के खिलाफ उनकी लड़ाई को बता रहे हैं

    यहां याद रहे कि मणिपुर के सीएम बीरेन सिंह पर कुकियों के साथ भेदभाव का आरोप लगता रहा है, दावा किया जाता है कि वह पूरे प्रशासनिक महकमें को पूरी तौर पर मैतेई समुदाय के पक्ष में खड़ा कर चुके हैं, जिसके कारण कुकियों में मणिपुर प्रशासन पर विश्वास का संकट खड़ा हो गया है.

    देश के दूसरे हिस्सों में भी हो रहा है विरोध प्रदर्शन  

    यहां सवाल सिर्फ मिजोरम का नहीं है, देश के दूसरे हिस्सों से भी आदिवासी संगठनों के द्वारा कुकियों से समर्थन में प्रदर्शन किया जा रहा है, खास कर कुकी समुदाय की महिलाओं का नग्न परेड का वीडियो सामने आने के बाद यह आक्रोश और भी तेज हुआ है,  बीरेन सिंह इसे मणिपुर का आंतरिक मामला बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे मानवाधिकार का  उल्लघंन और नस्लीय भेदभाव का मामला बता रहे है. किसी भी राज्य में जब इस तरह का भेदभाव होगा तो उसका विरोध लाजमी है.


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