रोजी रोटी और रोजगार की दिशा में हेमंत सरकार का बड़ा फैसला!  गोविंदपुर-साहिबगंज हाईवे पर तीन हजार एकड़ में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने की योजना

    रोजी रोटी और रोजगार की दिशा में हेमंत सरकार का बड़ा फैसला!  गोविंदपुर-साहिबगंज हाईवे पर तीन हजार एकड़ में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने की योजना

    Ranchi-झारखंड से गुजरती अमृतसर कोलकाता फ्रंट कॉरिडोर पर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के निर्माण में केन्द्र सरकार की बेरुखी को देख कर हेमंत सरकार ने अपने संसाधनों से गोविंदपुर-साहिबगंज हाईवे पर 3000 एकड़ में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने का फैसला किया है, यह कॉरिडोर धनबाद, जामताड़ा, देवघर, दुमका, पाकुड़ और साहिबगंज में निर्मित किया जायेगा. इन जिलों में 500 एकड़ के छह कॉरिडोर का निर्माण किये जाने की योजना है.

    इन जिलों के डीसी के साथ पहले ही हो चुकी ही बैठक

    सीएम हेमंत सोरेन ने इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की रुप रेखा तय करने के लिए इन जिलों के डीसी के साथ आठ जून को ही बैठक की थी. बैठक में सीएम हेमंत ने अधिकारियों को एक माह में रिपोर्ट सुपुर्द करने का निर्देश दिया था. राज्य सरकार की योजना पहले साहिबगंज-गोविंदपुर हाईवे पर 500 एकड़ में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने की थी, लेकिन अब इसमें बदलाव करते हुए छह जिलों को शामिल किया गया है.

    सीएम हेमंत का आदेश, किसी भी बस्ती या गांव को उजाड़ने की नौबत नहीं आये

    सीएम हेमंत ने अधिकारियों को साफ कर दिया है कि इस कॉरिडोर के निर्माण में किसी भी बस्ती को उजाड़ा नहीं जायेगा, अधिकारियों को बेकार पड़े जमीनों को ही चिह्नित करने का साफ निर्देश है. जिसके कि किसी भी परिवार को विस्थापित होने की नौबत नहीं आये.  

    यहां बता दें कि इस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में छोटे-बड़े इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर बनाए जाएंगे. जहां देश पर के उद्यमी अपने अपने उद्योग की स्थापना कर सकेंगे. हेमंत सरकार की योजना इन उद्योगों के निर्माण से झारखंड के युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाने की है. ताकि उन्हे रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की खाक नहीं छानना पड़े.

    इसके पहले बरही में हो चुका है इस योजना का विरोध

    ध्यान रहे कि इसके पहले केन्द्र सरकार ने कोलकाता-अमृतसर कॉरिडोर पर बरही में 25 सौ एकड़ जमीन पर इंडस्ट्रियल क्लस्टर बनाने की घोषणा की थी, लेकिन स्थानीय लोगों ने जमीन देने से इंकार कर दिया था, लोगों के विरोध को देखते हुए इस फैसले को अंतिम अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका. अब राज्य सरकार ने इसके लिए उजाड़ और बंजर जमीनों को  लेने का निर्देश दिया है, ताकि लोगों का विस्थापन भी नहीं हो और उनकी रोजी रोटी और रोजगार की व्यवस्था भी की जा सके.


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