दस साल पहले भी बिटकॉइन में कोई 24 हजार रुपए लगा दिया होता, तो करोड़पति बन ही जाता, आज भारत में भी इसे लेकर है गजब का दीवानापन !, पढ़िए

    दस साल पहले भी बिटकॉइन में कोई 24 हजार रुपए लगा दिया होता, तो करोड़पति बन ही जाता, आज भारत में भी इसे लेकर है गजब का दीवानापन !, पढ़िए

    टीएनपी डेस्क (Tnp desk):- बिटकॉइन में महज चंद पैस लगाकार ही लोग दौलतमंद बन गये, उन छुट्टे पैसों से जो आज बच्चों के पॉकेट मनी से भी कम है.इस डिजिटल करेंसी ने बेशुमार दौलत अपने निवेशकों को दी औऱ आज भी इसमे लगातार बढ़ने की संभानाए विशेषज्ञ जता ही रहे हैं.सोचिए क्या अदुभत और अंचभित करने वाला रिटर्न बिटकॉइन ने दिया कि साल 2015 में भी किसी ने 24 हजार रुपए में कोई एक बिटकॉइन खरीदा होता तो आज की तारिख में लगभग करोड़पति होते, क्योंकि आज एक बिटकॉइन की कीमत 91 लाख रुपए है. लाजमी है कि समय के साथ इसके दाम में बढ़ोत्तरी ही होगी.

    बिटकॉइन ने दुनिया में लाई क्रांति

    बिटकॉइन ने अचानक दुनिया में आकर लोगों को एक नहीं राह निवेश को लेकर दिखाई, उन तमाम चिजों को भी एक तरह से दरनिकार कर दिया. जिसे लेकर काफी पेंचिंदा और मध्यस्थ की लंबी चेन सरीखे श्रृखंला है. सच्चाई है कि जब कोई चिज की शुरुआथ होती है, तो संकट के समय ही जन्म लेता है, बिटकॉइन भी कुछ ऐसा ही था. बताया जाता है कि साल 2008 के फाइनेंशियल क्राइसिस के बाद लोगों का भरोसा बैंकों और अन्य वित्तिय संस्थानों पर डगमगाने लगा था. क्योंकि उस दरमियान रातोंरात अमेरिका के कभी ने डूबने वाले बैंक बंद हो गए थे. शेयर बाजार में तो पूरी दुनिया में भूचाल आ गया था. अमेरिका और जापान के साथ-साथ भारत जैसे देशों में भी बैंक और कई बड़ी कंपनियां डूबने की कगार पर पहुंच गई. उस वक्त की मंदी के दौरान नौकरियां जाने लगी थी. इसके पीछे वजह ये मानी जा रही थी कि बैंकों ने आम लोगों से पैसा लेकर ज्यादा कमाई के लिए उसे बड़ी-बड़ी कंपनियों को बिना सोचे समझें लोन पर देते चले गए और वो कर्ज वापसी नही हुई औऱ डूब गया. तब ही सातोषी नाकामोता ने नए जमाने की करेंसी लाने की सोची.

    2008 में आया बिटकॉइन

    हालांकि, सातोषी नाकोमाता आज तक सामने नहीं आये है और आज भी एक गुमनाम शख्स है. इसने ही दुनिया के सामने इंटरनेट पर एक पेपर रिलीज़ किया. जिसमे उन्होंने क्रिप्टोकरेंसी के बारे में बताया. इसके जरिए उन्होंने अपने मकसद को साफ कर दिया कि कैसे बिटकॉइन काम करेगा. इसमे इसके लेन-देन में किसी भी बैंक या संस्था की कोई जरुरत नहीं होगी. दरअसल, बिटकॉइन जिस कोड से बना है. उसकी शुरुआत सातोषी नाकामोता ने 2007 में ही शुरु कर दी थी. लेकिन 2008 में उन्होंने साथ काम करने वाले साथियों के साथ मिलकर Bitcoin.org का Domain ख़रीदा और उस Address पर वेबसाइट बना दी. उन्होंने इस बारे में पूरी डिटेल से बताई कि यह डिजिटल करेंसी , जिसका उन्होंने बिटकॉइन नाम दिया है. वो आखिर कैसे काम करेगी.

    डिजिटल करेंसी है बिटकॉइन

    बिटकॉइन एक ऐसी करेंसी जिसे कोई छू नहीं सकता है.इसे सिर्फ डिजिटल फॉर्म में ही रखा जाता हैं. लिहाजा, इसे, दूसरे लोगों के पास भेजने के लिए ज्यादा दिक्कते नहीं होती. सोचिए अभी आपको अगर अपने किसी रिश्तेदार या किसी दोस्त को विदेश में पैसे ट्रांसफर करने होते है तो बैंक और कई संस्थाएं इसके लिए आपसे मोटी रकम वसूलती है. साथ ही, एक से दो दिन का समय लगाती है. इसके उलट आप Bitcoin को कुछ ही मिनटों में भेज जाता है. शुरुआत में तो कोई इसे जानता तक नहीं था औऱ न ही इस पर कोई भरोसा ही कर रहा था. लेकिन जिन्होने ने भी चंद पैसे भी लगाए यानि 5 औऱ 10 रुपया भी लगाया, तो आज वो निवेशक करोड़पति बन गया है. आज के समय में बिटकॉइन अपने आप में इतना बड़ा हो चुका है कि उसकी मार्केट वैल्यू कई देशों की जीडीपी से भी ज्यादा हो गई है. फिलहाल एक बिटकॉइन की की कीमत भारतीय रुपए के हिसाब से आज बाजार भाव के अनुसार 91 लाख रुपए के पार है .

    बिटकॉइन पर किसी का नहीं कंट्रोल

    बिटकॉइन और आम मुद्रा जैसे रुपया,डॉलर, यूरो, येन मे एक बड़ा अंतर है कि आम करेंसी सरकार और बैंक के कंट्रोल में होती है. सरकार जब चाहे उतनी करेंसी को छाप सकती है. सरकार चाहे तो किसी के अकाउंट को फ्रीज़ भी कर सकती है . जबकि बिटकॉइन  को कोई कंट्रोल नहीं करता. इसे ना ही बैंक औऱ ना ही कोई सरकार की निगरानी में है. दरअसल, बिटकॉइन को आपके सिवा कोई कंट्रोल नही कर सकता.

    बिटकॉइन की खास चिजें

    बिटकॉइन को जो सबसे खास बनाती है कि वह है उसके पीछे ब्लॉकचेन टेक्नॉलिजी जिसे दुनिया का ध्यान उसकी तरफ खीचा है. दरअसल, ब्लॉकचेन कई सारे ब्लॉक्स की चैन होती है जिसमे जानकारी को स्टोर करके रखा जाता है.उदाहरण के तौर पर समझे तो जैसे बैंक सभी लेन देन की जानकारी के लिए अपना लेजर एकाउंट रखते है. उसी तरह का काम ब्लॉकचेन करता है. इसमे एक अलग बात ये है कि बैंक की लेजर बुक में बदलाव किया जा सकता है. लेकिन, ब्लॉकचेन में जो जानकारी एक बार डाल दी गई तो उसको चाहकर भी दोबारा से बदला नहीं जा सकता है.हर ब्लॉक की जानकारी जमा करने की एक लिमिट होती है जैसे ही वो ब्लॉक जानकारी से भर जाती है वो ब्लॉक दूसरे ब्लॉक्स के साथ जुड़ जाता है और यह प्रक्रिया चलती रहती है जिससे यह एक चैन बन जाती है. इसलिए इसको ब्लॉकचेन कहा जाता है.इसमे होता ये है कि जितने ज्यादा लोग एक क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करेंगे उतनी ही ज्यादा चैन बनती जाएगी जितनी बड़ी चैन होगी उतना ज्यादा उस क्रिप्टो की ब्लॉकचेन मजबूत होती जाएगी और उसको हैक या अटैक करना मुश्किल होता जाएगा.

    महंगई से लड़ने में मददगार

    बिटकॉइन के प्रति लोगों के झुकाव की एक वजह महंगाई भी है , जिससे यह डिजिटल करंसी ल़ड़ रहा है औऱ आम आदमी के लिए एक हथियार की तरह काम कर रहा है. इसके पीछे वजह ये है कि डॉलर या दूसरी किसी भी पारंपरिक करेंसी की तुलना में इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि बिटकॉइन की संख्या सीमित है. बताया जाता है कि 21 मीलियन ही बिटकॉइन है. लिहाजा, इसे कोई कम नही कर सकता है और न ही कोई छाप सकता है. इससे पहले गोल्ड को महंगाई के खिलाफ हेजिंग का सबसे बढ़िया निवेश माना जाता है, क्योंकि इसकी भी एक लिमिट है. इसलिए लगातार समय के साथ इसके दाम में इजाफा होता रहता है.

    भारत में क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य

    भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कोई कानूनी मान्यता नहीं दी गई है , और न ही इसे लेकर कोई रेगुलेटरी का गठन किया गया है. इसके बावजूद लोगों की दिलचस्पी और पैसा कमाने की ललक सातवें आसमान पर देखने को मिल रही है. दिन पर दिन इसका बाजार और दायरा बढ़ता ही जा रहा है. आने वाले वक्त में इसका प्रसार तेजी से बढ़ेगा ही , आज मार्केट में 1000 से ज्यादा क्रिप्टोकरेंसी मौजूद है. दुनिया में भी इसकी धूम मची हुई है, लिहाजा इससे कहा जा सकता है कि इसका आकर्षण कम नहीं होने वाला बल्कि बढ़ेगा ही. भारत में भी इसका दायरा सिकुड़ने वाला नहीं दिखता, बल्कि बढ़ेगा ही . तमाम विशेषज्ञ भी अपनी राय इस पर यही दे रहे हैं.


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