झारखंड ही नहीं देश से विदा करो! जानिये कैसे सीएम हेमंत ने पीएम मोदी को गुजरात भेजने का किया आह्वान

    झारखंड ही नहीं देश से विदा करो!  जानिये कैसे  सीएम हेमंत ने पीएम मोदी को गुजरात भेजने का किया आह्वान

    Ranchi-लम्बे अर्से से बेहद शांत सा चल रहे सीएम हेमंत की रंगत कुछ कुछ चुनावी नजर आने लगी है. ईडी सीबीआई के साथ ही वह केन्द्र सरकार के खिलाफ एक बार फिर से आक्रमक रुख अख्तियार करते हुए दिखलायी पड़ने लगे हैं. आपकी योजना, आपकी सरकार, आपके द्वारा कार्यक्रम के दौरान बरेहट में उनके भाषणों से इस बात की झलक मिल रही है कि शायद वह 2024 का लोकसभा चुनाव और इसके साथ ही 2025 के विधान सभा के लिए चुनावी प्रचार का सिंहनाद करने की तैयारी में हैं

    पांच राज्यों के चुनाव के खत्म होती ही शुरु हो जायेगी लोकसभा चुनाव की सरगर्मी

    वैसे भी पांच राज्यों के चुनाव प्रचार खत्म होते ही देश में लोक सभा चुनाव की सरगर्मी तेज हो जायेगी. सीएम हेमंत के सामने लोकसभा के 14 सीटों पर इंडिया गठबंधन का झंडा फहराने का दारोमदार होगा. लोकसभा चुनाव में मिली उनकी सफलता और असफलता ही इस बात का पैमाना होगा कि 2025 में उनकी वापसी कितनी मुश्किल और कितनी आसान रहने वाली है. इसके विपरीत कांग्रेस आज भी झारखंड में पूरे तरीके से झाममो और सीएम हेमंत की रणनीतियों पर निर्भर है. वह इस स्थिति में कहीं से भी नहीं है कि सीटों के मामले में कोई बड़ी दावेदारी पेश करें. इस प्रकार सीएम हेमंत झारखंड में निर्विवाद रुप से इंडिया गठबंधन का सबसे मजबूत चेहरा और उसका खेवनहार हैं.

    जनभावनाओं की नब्ज टटोलने की कोशिश कर रहे हैं सीएम हेमंत

    और शायद सीएम हेमंत अपनी इसी भूमिका को आगे बढ़ाते हुए आपकी योजना, आपकी सरकार, आपके द्वारा कार्यक्रम के माध्यम से जनता के नब्ज को टटोलने की कोशिश कर रहे हैं. यह साध लेने की कोशिश कर रहे हैं कि सरकार की विभिन्न योजनाओं का जमीनी सच गया है. क्या वह तमाम योजनाएं उसी रुप में जमीन तक पहुंच रही है, जिस रुप में उन्होंने उसकी कल्पना की थी या उसका भी वही हश्र हुआ, जो दूसरे सरकारों की योजनाओं का होता रहा है. यही कारण है कि वह दलित, आदिवासी पिछड़े छात्रों को उच्च शिक्षा के दुनिया की शीर्ष संस्थानों में भेजने के अपनी सरकार के फैसले का जमीनी टेस्ट ले रहे है. इस बात को आश्वस्त होने की कोशिश कर रहे हैं कि इस योजना को लेकर आदिवासी दलित और पिछड़े वर्ग की क्या प्रतिक्रिया है, जिस प्रकार सरकार के द्वारा पिछड़ों के आरक्षण का विस्तार का फैसला लिया गया, उसका जमीनी असर क्या है. जिस 1932 का खतियान और खतियान आधारित नियोजन नीति लेकर उन्होंने विधान सभा से प्रस्ताव पास कर राजभवन भेजा, और राजभवन के द्वारा जिस तरीके से उसे ठंडे वस्ते में डाल दिया गया, उसको लेकर आम जनों की प्रतिक्रिया क्या है. आदिवासी समाज के लिए जिस सरना धर्म कोड की बिल को उन्होंने पास कर केन्द्र के पाले में डाला, उसको लेकर लोगों की राय क्या है. इस प्रकार वह तमाम योजनाएं, जिनकी शुरुआत उनकी सरकार के द्वारा की गई, उसका हाल क्या है, सीएम हेमंत लोकसभा का बिगुल बजने के ठीक पहले इसका आकलन कर अपनी जमीनी ताकत को परखना चाहते हैं.

    खामोशी का चादर उतार सीधी चुनौती पेश करते दिख रहे हैं हेमंत

    र यही कारण है कि ईडी के पांचवें समन के बाद उनके द्वारा जिस तरीके से खामोशी का चादर ओढ़ा गया था, अब वह उसे उतार फेंकते नजर आते हैं. इसकी बड़ी झलक तब मिलती है, जब वह पूरे देश से भाजपा के सफाये के साथ ही पीएम मोदी को वापस गुजरात भेजने का आह्वान कर रहे हैं. और इस आह्वान के बाद वह लोगों की प्रतिक्रिया को समझने की कोशिश कर रहे हैं. सीएम हेमंत ने भाजपा को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि पीएम मोदी राजस्थान में चार सौ रुपये में गैस सिलेंडर देने का वादा कर वोट बटोरने की कवायद तो कर रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि झारखंडियों ने क्या गुनाह किया है? आखिर उसी गैस सिलेंडर के लिए झारखंडियों को 11 सौ रुपये क्यों वसूला जा रहा है? क्या सिर्फ इसलिए कि अभी झारखंड में उन्हे वोट मांगने की जरुरत नहीं है. क्या जिन जिन राज्यों में चुनाव होगा, पीएम मोदी उन्ही राज्यों में छुट्ट का यह तोहफा प्रदान करेंगे, बाकि के राज्यो के हिस्से वही मंहगाई की मार होगी, हर बात में एक देश एक ... का राग अलापने वाली भाजपा हर राज्य के लिए अलग अलग कीमत क्यों तय कर रही है.

    झारखंड के सबसे भ्रष्ट व्यक्ति को बनाया ओड़िशा का राज्यपाल

    इसके साथ ही सीएम हेमंत ने पूर्व सीएम रघुवर दास को लेकर भी भाजपा पर जमकर निशाना साधा, उन्होंने कहा कि दूसरों पर भ्रष्टाचार का कीचड़ उछालने वाली भाजपा को झारखंड के सबसे भ्रष्ट्र व्यक्ति रघुवर दास के सिर पर गर्वनर का ताज पहनाने पर कोई शर्म महसूस नहीं हुई, एक बाबूलाल हैं, 14 बरसों तक झारखंड के कोने कोने में भटक कर भाजपा के खिलाफ आग उगल रहे थें, झारखंड का दूसरा गुरु बनने का सपना देख रहे थें, लेकिन जैसे ही 14 वर्षों का वनवास खत्म हुआ, वह उसकी भाजपा में लौट गयें, जिसको लेकर उन्होंने कहा था कि भाजपा में जाने के बजाय वह कुतुबमीनार से कूदने ज्यादा पसंद करेंगे.


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