झारखंड के सदर अस्पतालों में सीनियर हॉस्पिटल मैनेजरों की नियुक्ति: डॉक्टर या मैनेजमेंट प्रोफेशनल, किसे मिली जिम्मेदारी?

झारखंड के सदर अस्पतालों में सीनियर हॉस्पिटल मैनेजरों की नियुक्ति: डॉक्टर या मैनेजमेंट प्रोफेशनल, किसे मिली जिम्मेदारी?

TNPDESK:झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने राज्य के विभिन्न सदर अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में 29 सीनियर हॉस्पिटल मैनेजरों की पदस्थापना का आदेश जारी किया है. पहली नजर में यह एक सामान्य प्रशासनिक निर्णय प्रतीत होता है, लेकिन नियुक्ति की पात्रता और चयन प्रक्रिया को देखें तो यह राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है.

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सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार ये नियुक्तियां राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संविदा आधार पर की गई हैं. महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि सीनियर हॉस्पिटल मैनेजर का पद विशुद्ध रूप से चिकित्सकीय नहीं, बल्कि अस्पताल प्रबंधन से जुड़ा पद है. इसके लिए एमबीबीएस डॉक्टरों के साथ-साथ हॉस्पिटल मैनेजमेंट, हेल्थकेयर एडमिनिस्ट्रेशन, एमबीए (हॉस्पिटल मैनेजमेंट) और मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ (MPH) जैसी योग्यताओं वाले अभ्यर्थियों को भी पात्र माना गया था.

चयन प्रक्रिया में शैक्षणिक योग्यता के साथ अस्पताल प्रशासन एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन का न्यूनतम पांच वर्षों का अनुभव अनिवार्य रखा गया था. इससे स्पष्ट है कि सरकार अस्पतालों के संचालन में केवल चिकित्सकीय विशेषज्ञता नहीं, बल्कि पेशेवर प्रबंधन कौशल को भी प्राथमिकता देना चाहती है.

स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक अस्पताल अब केवल इलाज के केंद्र नहीं रह गए हैं. मानव संसाधन प्रबंधन, वित्तीय निगरानी, मरीज सुविधा, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और संसाधनों के बेहतर उपयोग जैसे कार्यों के लिए प्रशिक्षित प्रबंधन विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है. यही कारण है कि देश के कई बड़े सरकारी और निजी अस्पतालों में चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ-साथ अस्पताल प्रबंधन पेशेवरों की भूमिका लगातार बढ़ रही है.

हालांकि नियुक्तियों के बाद एक महत्वपूर्ण सवाल भी उभर रहा है कि इन पदों पर चयनित अभ्यर्थियों में कितने चिकित्सक हैं और कितने गैर-चिकित्सकीय प्रबंधन विशेषज्ञ. सरकार की ओर से जारी पदस्थापन सूची में केवल नाम और तैनाती स्थल का उल्लेख है, जबकि चयनित उम्मीदवारों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि सार्वजनिक नहीं की गई है. ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अस्पतालों के प्रशासनिक नेतृत्व में डॉक्टरों का वर्चस्व रहेगा या प्रबंधन विशेषज्ञों की भूमिका अधिक प्रभावी होगी.

स्वास्थ्य प्रशासन से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि इन नियुक्तियों का उद्देश्य अस्पतालों में जवाबदेही बढ़ाना, संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना है, तो चयनित अधिकारियों की योग्यता और कार्य निष्पादन पर विशेष निगरानी आवश्यक होगी.

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि झारखंड सरकार स्वास्थ्य संस्थानों के संचालन में प्रोफेशनल मैनेजमेंट मॉडल को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रही है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह प्रयोग अस्पतालों की कार्यसंस्कृति और मरीजों को मिलने वाली सेवाओं में कितना सकारात्मक बदलाव ला पाता है.