Jharkhand

पूर्वी सिंहभूम में ब्रेन मलेरिया ने बढ़ाई चिंता, अब तक 7 लोगों की मौत,फिर मिले 98 नए केस

Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Sr. Content Writer

टीएनपी डेस्क (TNP DESK):झारखंड के पूर्वी सिंहभूम में इन दिनों ब्रेन मलेरिया ने कहर बरपा रखा है.अब तक जिले के अलग-अलग हिस्सों में 7 लोगों की मौत हो चुकी है.वहीं, बुधवार को जांच के दौरान 98 नए मरीज मिले है. पिछले 24 घंटे के दौरान ब्रेन मलेरिया से दो लोगों की मौत हुई है, जिसमें 5 साल की एक बच्ची और 50 साल की एक महिला शामिल है.इससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता और बढ़ गई है.

 अब तक 7 लोगों की मौत

बताया जा रहा है कि बुधवार को पोटका के रहने वाले गणेश सरदार की 5 साल की मासूम बेटी राखी सरदार की एमजीएम अस्पताल में ब्रेन मलेरिया से मौत हो गई.वहीं, तुडियाबेड़ा निवासी मेरी भंडारा (50) की टीएमएच में इलाज के दौरान मौत हुई.हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार प्रभावित गांवों में मच्छरदानी वितरण, फॉगिंग और घर-घर जाकर जांच करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है.संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और मौत का आंकड़ा भी धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है.

98 नए ब्रेन मलेरिया संक्रमित मरीज मिले

वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को अब तक का सबसे बड़ा जांच अभियान चलाया.इस दौरान 12,518 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 98 ब्रेन मलेरिया संक्रमित मरीज मिले.इनमें पोटका में सबसे अधिक 44 संक्रमित मिले.इसके अलावा डुमरिया में 20,s घाटशिला में 19, मुसाबनी में 15, पटमदा में 13, धालभूमगढ़ में 9, चाकुलिया में 4 तथा बहरागोड़ा, बारीडीह शहरी क्षेत्र, सदर अस्पताल क्षेत्र और जुगसलाई में एक-एक मरीज मिले है.आपको बता दें कि पोटका के केंदा और हरिणा पंचायत संक्रमण के सबसे बड़े केंद्र बने हुए है. वहीं, डुमरिया और मुसाबनी में भी लगातार मरीजों की संख्या बढ़ रही है.

चार दिनों में एक लाख लोगों की मलेरिया जांच करने का लक्ष्य

लगातार बढ़ रहे ब्रेन मलेरिया के मरीजों की संख्या को देखते हुए जमशेदपुर के उपायुक्त राजीव रंजन ने स्वास्थ्य विभाग को बड़ा निर्देश दिया है.उन्होंने अगले चार दिनों में एक लाख लोगों की मलेरिया जांच करने का लक्ष्य दिया है. डीसी कार्यालय में आयोजित स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में सभी 11 प्रखंडों में जांच अभियान तेज करने और बरसात के मौसम को देखते हुए डेंगू व चिकनगुनिया को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया.

अब लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत

स्वास्थ्य विभाग की ओर से संक्रमण पर रोक लगाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत है. बरसात के दिनों में संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है.ऐसे में अपने घर के आसपास जलजमाव, झाड़ियां और गड्ढों में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए, क्योंकि ऐसे स्थानों पर मच्छर पनपते हैं, जिससे ब्रेन मलेरिया और डेंगू का खतरा बढ़ जाता है.केवल जांच, दवा वितरण और विभाग की जागरूकता से ही स्थिति नहीं बदलेगी, जब तक आम लोग खुद अपनी सेहत और साफ-सफाई को लेकर सजग नहीं होंगे.इसलिए जरूरी है कि लोग जनभागीदारी को समझें, संकल्प लें और सरकार व स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करें.

ब्रेन मलेरिया को रोकने का उपाय

आपको बता दें कि ब्रेन मलेरिया पीएफ (प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम) परजीवी से होने वाला मलेरिया का सबसे खतरनाक रूप है.इसमें संक्रमण दिमाग तक पहुंच जाता है. इसके शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, बेहोशी, भ्रम, दौरे और कोमा जैसी स्थिति शामिल हो सकती है.यदि समय पर इलाज नहीं मिले तो मरीज की जान भी जा सकती है. अगर बरसात के दिनों में अचानक तेज बुखार आए तो बिना किसी देरी के डॉक्टर से संपर्क करें. हालांकि, विभाग की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में फॉगिंग कराई जा रही है, लेकिन आम लोगों को भी अपने घर और आसपास साफ-सफाई रखनी होगी तथा पानी जमा नहीं होने देना होगा. ऐसे स्थानों पर मच्छर पनपते हैं, जिससे ब्रेन मलेरिया का खतरा बढ़ जाता है.यदि स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों के साथ आम लोगों की जागरूकता भी जुड़ जाए, तो ब्रेन मलेरिया पर नियंत्रण पाना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा.