टीएनपी डेस्क (TNP DESK): आज विश्व हृदय दिवस के मौके पर लोगों को दिल की सेहत के प्रति जागरूक किया जा रहा है. हृदय रोग आज दुनिया भर में गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हैं. हार्ट अटैक या हृदय से जुड़ी गंभीर समस्या होने पर एंजियोप्लास्टी से लेकर बाईपास सर्जरी तक इलाज की जरूरत पड़ सकती है. ऐसे इलाज का खर्च कई परिवारों के लिए आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है. अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी दवाइयों, जांच और नियमित डॉक्टर विजिट का खर्च जारी रहता है. वहीं, मरीज के लंबे समय तक काम से दूर रहने पर परिवार की आय भी प्रभावित हो सकती है. ऐसे में हृदय रोग से बचाव के साथ समय पर जांच और इलाज बेहद जरूरी है.
खान-पान में इन बातों का रखें ध्यान
दिल को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले खान-पान पर ध्यान देना जरूरी है. डाइट में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, नट्स और सीड्स को शामिल किया जा सकता है. वहीं ज्यादा नमक, अतिरिक्त चीनी और अनहेल्दी फैट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना बेहतर माना जाता है. घर का बना ताजा खाना प्राथमिकता में रखें और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, डीप फ्राइड स्नैक्स और शुगर वाले पेय पदार्थों से दूरी बनाएं. संतुलित आहार वजन, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है.
रोजाना थोड़ी फिजिकल एक्टिविटी जरूरी
दिल की सेहत के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण है. इसके लिए शुरुआत से ही कठिन एक्सरसाइज करना जरूरी नहीं है. तेज गति से पैदल चलना, साइकिल चलाना या तैराकी जैसी गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है. छोटी-छोटी आदतें भी फायदेमंद हो सकती हैं, जैसे कम दूरी के लिए पैदल जाना, लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में कुछ मिनट चलना. हालांकि किसी गंभीर बीमारी या पहले से मौजूद हृदय समस्या में व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना उचित है.
BP और कोलेस्ट्रॉल की जांच को न करें नजरअंदाज
हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल कई बार बिना स्पष्ट लक्षण के भी मौजूद रह सकते हैं. इसलिए समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना जरूरी है. अगर डॉक्टर ने कोई दवा लिखी है तो उसे निर्धारित तरीके से लेते रहें और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा बंद या उसकी खुराक में बदलाव न करें. नियमित जांच से जोखिम वाले कारकों की पहचान समय रहते की जा सकती है और जरूरत के अनुसार इलाज शुरू किया जा सकता है.
स्मोकिंग और शराब से दूरी जरूरी
स्मोकिंग हृदय और रक्त वाहिकाओं के लिए नुकसानदेह हो सकती है और हृदय रोग तथा स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाती है. इसलिए धूम्रपान से बचना जरूरी है. साथ ही सेकेंड-हैंड स्मोक यानी दूसरे व्यक्ति के धुएं के संपर्क में आने से भी बचने की कोशिश करनी चाहिए. शराब का सेवन भी स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है, इसलिए इससे दूरी बनाना हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है.
अच्छी नींद और स्ट्रेस मैनेजमेंट भी जरूरी
दिल की सेहत के लिए पर्याप्त और नियमित नींद के साथ तनाव को नियंत्रित करना भी महत्वपूर्ण है. लंबे समय तक खराब नींद और ज्यादा तनाव ब्लड प्रेशर तथा मेटाबॉलिक हेल्थ को प्रभावित कर सकते हैं. सोने और जागने का नियमित समय रखने की कोशिश करें. तनाव कम करने के लिए रोजाना टहलना, योग, ब्रीदिंग एक्सरसाइज और परिवार या दोस्तों के साथ समय बिताना मददगार हो सकता है.
आयुष्मान भारत से इलाज में मिल सकती है आर्थिक राहत
हृदय रोग के इलाज का खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है. ऐसे में पात्र परिवारों के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) आर्थिक राहत का माध्यम हो सकती है. योजना के तहत पात्र परिवारों को प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिलता है. सूचीबद्ध अस्पतालों में पात्र लाभार्थियों को कई गंभीर बीमारियों और प्रक्रियाओं के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा मिल सकती है. कार्डियक उपचार भी योजना के तहत कवर की जाने वाली सेवाओं में शामिल है. हालांकि किस बीमारी या प्रक्रिया के लिए कितनी सहायता मिलेगी, यह पात्रता, उपचार और योजना के तहत निर्धारित पैकेज पर निर्भर करता है. इसलिए इलाज की जरूरत होने पर संबंधित अस्पताल और योजना के आधिकारिक पोर्टल से कवरेज की जानकारी जरूर जांचें.
समय पर पहचान और इलाज सबसे अहम
दिल की बीमारी से बचाव के लिए केवल इलाज पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है. संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान से दूरी, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच जैसे कदम जोखिम कम करने में मदद कर सकते हैं. अगर सीने में दर्द या दबाव, सांस लेने में परेशानी, अचानक पसीना, चक्कर या असामान्य कमजोरी जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत चिकित्सकीय मदद लें.
