टीएनपी डेस्क (TNP DESK): अक्सर कई लोग अपना समान एक जगह रखकर भूल जाते है. ऐसा बुजुर्गों में ही नहीं बल्कि आजकल के बच्चों में भी देखने को मिल रहा है. कम उम्र में याददाश्त कमजोर होने की समस्या अब बच्चों और युवाओं में भी देखने को मिल रही है. कई बच्चे पढ़ाई के दौरान सीखी हुई बातें जल्दी भूल जाते हैं, जबकि कुछ युवा जरूरी काम, सामान रखने की जगह या किसी से हुई बातचीत याद नहीं रख पाते. हालांकि, हर भूलने की समस्या को याददाश्त कमजोर होना नहीं कहा जा सकता. डॉक्टरों के अनुसार, ध्यान की कमी, तनाव, नींद की गड़बड़ी और खराब दिनचर्या के कारण भी ऐसा हो सकता है. अगर भूलने की समस्या लगातार बढ़ रही है और इसका असर पढ़ाई या रोजमर्रा के काम पर पड़ रहा है, तो इसके कारणों की जांच जरूरी है.
बच्चों में क्यों बढ़ रही है भूलने की समस्या?
बच्चों में याददाश्त और सीखने की क्षमता उनके विकास, नींद, खानपान और मानसिक स्थिति से जुड़ी होती है. आजकल कई बच्चे देर रात तक मोबाइल, टीवी या वीडियो गेम में व्यस्त रहते हैं. इससे उनकी नींद प्रभावित हो सकती है और पढ़ाई के दौरान ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है. स्कूल का दबाव, परीक्षा का तनाव और एक साथ कई गतिविधियों में व्यस्त रहना भी बच्चों की एकाग्रता को प्रभावित कर सकता है. कई बार बच्चे किसी बात को ध्यान से सुनते ही नहीं हैं, इसलिए बाद में उन्हें वह बात याद नहीं रहती. ऐसे में समस्या याददाश्त की बजाय ध्यान केंद्रित करने की हो सकती है.
नींद और तनाव का भी पड़ता है असर
याददाश्त को मजबूत बनाए रखने के लिए पर्याप्त नींद जरूरी है. नींद के दौरान मस्तिष्क दिनभर सीखी गई जानकारी को व्यवस्थित करता है. अगर बच्चे या युवा रोजाना देर रात तक जागते हैं, तो उनकी एकाग्रता और सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. इसी तरह लगातार तनाव, चिंता और मानसिक दबाव भी ध्यान भटकने और चीजें भूलने का कारण बन सकते हैं. डॉक्टरों के अनुसार, तनाव के कारण व्यक्ति किसी काम पर पूरी तरह ध्यान नहीं दे पाता, जिससे बाद में उसे लगता है कि उसकी याददाश्त कमजोर हो रही है.
खानपान और स्वास्थ्य संबंधी कारण
शरीर में कुछ पोषक तत्वों की कमी भी थकान, ध्यान की कमी और मानसिक सुस्ती से जुड़ी हो सकती है. उदाहरण के लिए, विटामिन B12 की कमी, आयरन की कमी और थायरॉयड से जुड़ी समस्याएं कुछ लोगों में ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं. हालांकि, केवल भूलने की शिकायत के आधार पर किसी पोषक तत्व की कमी मान लेना सही नहीं है. डॉक्टर जरूरत के अनुसार जांच की सलाह दे सकते हैं. बच्चों में पढ़ाई में लगातार परेशानी, विकास संबंधी समस्याएं या व्यवहार में बदलाव होने पर बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है.
मोबाइल और स्क्रीन टाइम कितना जिम्मेदार?
मोबाइल का इस्तेमाल सीधे तौर पर याददाश्त खत्म नहीं करता, लेकिन ज्यादा स्क्रीन टाइम नींद, ध्यान और शारीरिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है. खासकर बच्चों में लगातार वीडियो देखने या गेम खेलने की आदत पढ़ाई और दूसरी जरूरी गतिविधियों के लिए समय कम कर सकती है. इसलिए बच्चों के लिए उम्र के अनुसार स्क्रीन टाइम तय करना, रात में मोबाइल दूर रखना और पढ़ाई के दौरान ध्यान भटकाने वाली चीजों से बचना उपयोगी हो सकता है.
डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?
अगर भूलने की समस्या कभी-कभार होती है और रोजमर्रा के काम प्रभावित नहीं होते, तो नींद, खानपान और दिनचर्या में सुधार से मदद मिल सकती है. लेकिन अगर बच्चा लगातार पढ़ाई में पिछड़ रहा है, पहले सीखी बातें भूल रहा है या व्यवहार में बदलाव दिख रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. युवाओं में भी अचानक बढ़ती भूलने की समस्या, बातचीत में बार-बार एक ही बात पूछना या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर याददाश्त, ध्यान, नींद और अन्य स्वास्थ्य कारणों का मूल्यांकन कर सकते हैं.
