टीएनपी डेस्क (TNP DESK): अक्सर कई लोग रात में सोते समय दांत किटकिटाना या उन्हें आपस में जोर से पीसना आदत हो जाती है. मेडिकल भाषा में इस स्थिति को ब्रुक्सिज्म (Bruxism) कहा जाता है. खास बात यह है कि नींद में ऐसा होने के कारण कई लोगों को खुद इसकी जानकारी भी नहीं होती. अक्सर साथ सोने वाला व्यक्ति दांत पीसने की आवाज सुनकर इसके बारे में बताता है. कभी-कभार ऐसा होना जरूरी नहीं कि किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो, लेकिन यदि यह लगातार हो रहा है और इसके साथ जबड़े में दर्द, सिरदर्द या दांतों में संवेदनशीलता जैसी परेशानी भी है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
क्या है ब्रुक्सिज्म?
ब्रुक्सिज्म में व्यक्ति अनजाने में दांतों को जोर से भींचता या पीसता है. यह समस्या जागते समय भी हो सकती है, लेकिन कई लोगों में यह नींद के दौरान दिखाई देती है. लगातार दांत पीसने से दांतों की ऊपरी सतह घिस सकती है और जबड़े की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.
तनाव और चिंता हो सकते हैं कारण
तनाव और चिंता को दांत पीसने से जुड़े महत्वपूर्ण कारकों में माना जाता है. दिनभर का मानसिक तनाव कुछ लोगों में रात के समय दांत भींचने या पीसने के रूप में दिखाई दे सकता है. इसके अलावा गुस्सा, बेचैनी और लंबे समय तक तनाव में रहने जैसी स्थितियां भी इस आदत को प्रभावित कर सकती हैं. हालांकि हर व्यक्ति में इसका कारण एक जैसा नहीं होता.
नींद से जुड़ी समस्याओं से भी हो सकता है संबंध
कुछ मामलों में ब्रुक्सिज्म का संबंध नींद से जुड़ी परेशानियों से भी हो सकता है. खर्राटे लेने या ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया जैसी समस्या वाले कुछ लोगों में भी नींद के दौरान दांत पीसना देखा जा सकता है. इसलिए यदि दांत किटकिटाने के साथ तेज खर्राटे, नींद में सांस रुकने जैसा महसूस होना या दिन में अत्यधिक नींद आने की शिकायत हो तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
कैफीन और लाइफस्टाइल भी डाल सकते हैं असर
बहुत अधिक कैफीन का सेवन, खासकर शाम या रात में ज्यादा चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक लेना, कुछ लोगों में ब्रुक्सिज्म से जुड़ा हो सकता है. शराब और धूम्रपान जैसे कारक भी जोखिम बढ़ा सकते हैं. कुछ दवाओं के इस्तेमाल के साथ भी दांत पीसने की समस्या देखी जा सकती है. हालांकि किसी दवा को इसका कारण मानकर खुद से बंद नहीं करना चाहिए और डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए.
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
सुबह उठने के बाद जबड़े में दर्द या जकड़न, सिरदर्द, दांतों में दर्द या संवेदनशीलता और दांतों का धीरे-धीरे घिसना ब्रुक्सिज्म के संकेत हो सकते हैं. गंभीर मामलों में दांतों में दरार या डेंटल फिलिंग और क्राउन को भी नुकसान पहुंच सकता है.
कैसे मिल सकती है राहत?
तनाव कम करने की कोशिश, पर्याप्त नींद और नियमित सोने-जागने का समय मददगार हो सकता है. शाम के बाद अत्यधिक कैफीन से बचना भी उपयोगी हो सकता है. अगर समस्या लगातार बनी हुई है तो डेंटिस्ट दांतों की जांच के बाद माउथ गार्ड या नाइट गार्ड की सलाह दे सकते हैं. यह दांतों को सीधे एक-दूसरे से रगड़ने से बचाने में मदद करता है.
कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
यदि दांत नियमित रूप से किटकिटाते हैं, दांत घिस रहे हैं, जबड़े में लगातार दर्द रहता है या सुबह बार-बार सिरदर्द होता है तो डेंटिस्ट से जांच करानी चाहिए. वहीं दांत पीसने के साथ खर्राटे, सांस रुकने या नींद से जुड़ी दूसरी समस्याएं हों तो डॉक्टर से भी परामर्श लेना चाहिए. सही कारण की पहचान के बाद ही उचित उपचार तय किया जा सकता है.
नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है. किसी भी स्वास्थ्य समस्या के निदान या उपचार के लिए योग्य डॉक्टर या डेंटिस्ट की सलाह लें.
