टीनपी डेस्क (TNP DESK): ठंड का मौसम धीरे धीरे दस्तक देना शुरू कर दिया है. दिन में धूप और शाम में ठंड का एहसास होने लगा है. त्वचा का रूखापन और सुबह- शाम ठंड लगना, ये सब तापमान में गिरावट आने के बाद होता है. ऐसे में ठंड के मौसम में सर्दी- जुकाम होना आम बात है. लेकिन अगर आपको ठंड के मौसम में सांस लेने दिक्कत आ रही है ये यह समस्या चिंता का विषय बन जाता है. इसको नजरंदाज करने की गलती बिल्कुल न करे.
सांस लेने में दिक्कत होने वाले लोगों को ठंड में खास ध्यान रखने की जरूरत होती है. खासकर उन लोगों को अधिक सावधान रहने की जरूरत है, जिन्हें पहले से सांस या दिल से जुड़ी बीमारी है. सर्दियों में ठंडी हवा, कोहरा और बढ़ता प्रदूषण फेफड़ों पर असर डाल सकते हैं. ऐसे में अस्थमा और सीओपीडी (COPD) के मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है. वहीं, दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए भी ठंड का मौसम जोखिम भरा हो सकता है. इसलिए जरूरी है कि मौसम बदलने के साथ अपनी सेहत का भी खास ख्याल रखा जाए.
क्या है COPD, जिससे सांस लेने में होती है परेशानी?
COPD यानी क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है. इसमें सांस की नलियों में सूजन और संकुचन होने लगता है, जिससे हवा का अंदर जाना और बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है. इस बीमारी में मरीज को अक्सर सांस फूलने, लगातार खांसी रहने और बलगम बनने जैसी समस्याएं होती हैं. सीओपीडी के प्रमुख कारणों में सिगरेट-बीड़ी का धुआं, वायु प्रदूषण, धूल-मिट्टी और लकड़ी या कोयले के चूल्हे से निकलने वाला धुआं शामिल हैं. लंबे समय तक इन चीजों के संपर्क में रहने से फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. ठंड के मौसम में पहले से सांस की बीमारी से परेशान लोगों को अधिक दिक्कत हो सकती है.
ठंड में क्यों बढ़ जाती है सांस की परेशानी?
सर्दियों में ठंडी और शुष्क हवा सांस की नलियों में जलन पैदा कर सकती है. वहीं, कोहरे के साथ मौजूद प्रदूषक कण भी फेफड़ों को प्रभावित कर सकते हैं. इससे खांसी, घरघराहट और सांस फूलने की समस्या बढ़ सकती है. कुछ लोगों को सीने में जकड़न भी महसूस होती है. जिन लोगों को पहले से अस्थमा या सीओपीडी है, उनके लिए तापमान में अचानक गिरावट परेशानी बढ़ा सकती है. ऐसे में सुबह की तेज ठंड और प्रदूषण के संपर्क में आने से बचना जरूरी है.
हार्ट के मरीजों को क्यों रहना चाहिए सावधान?
दिल और फेफड़े शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए मिलकर काम करते हैं. फेफड़ों की बीमारी बढ़ने पर शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने में परेशानी हो सकती है, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. इसके अलावा, ठंड में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ सकती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ने और हृदय पर काम का बोझ बढ़ने की आशंका रहती है. जिन लोगों को पहले से हार्ट की बीमारी है, उन्हें सांस फूलने, सीने में दर्द या असामान्य थकान को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. हालांकि, सांस फूलने की हर समस्या COPD या हार्ट की बीमारी के कारण ही हो, यह जरूरी नहीं है.
सर्दियों में कैसे रखें अपनी सेहत का ख्याल?
-सुबह बहुत अधिक ठंड या घना कोहरा होने पर बाहर टहलने से बचें. जरूरत हो तो घर के अंदर व्यायाम करें.
-बाहर निकलते समय गर्म कपड़े पहनें और नाक-मुंह को स्कार्फ या मास्क से ढकें.
-धूल, धुएं, सिगरेट और अधिक प्रदूषण वाली जगहों से दूरी बनाए रखें.
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार इनहेलर और हार्ट की दवाएं नियमित लें. खुद से दवा बंद न करें.
-सर्दी-जुकाम के साथ सांस लेने में परेशानी बढ़े, तो समय पर डॉक्टर से संपर्क करें.
