टीएनपी डेस्क (TNP DESK): फिट रहना कौन नहीं चाहता. फिट रहने के लिए हेल्थी खाना और हेल्थी लाइफस्टाइल रखना होता है जो की आजकल के युवा आम तौर पर करते है. आज कल फिटनेस और हेल्थ को लेकर लोग पहले से ज्यादा जागरूक है कोई जिम जाकर फिट राहत है तो कोई घर पर एक्सर्साइज़ करके. वही कोई वजन कम या बढ़ाने के लिए अपनी डाइट में बदलाव कर रहा है. ऐसे में प्रोटीन हर किसी की डाइट का अहम हिस्सा बन गया है. शरीर में मांसपेशियों की मरम्मत, हड्डियों की मजबूती और कई जरूरी प्रक्रियाओं के लिए प्रोटीन की जरूरत होती है. नॉन-वेज खाने वाले लोगों के लिए चिकन और अंडा प्रोटीन के अच्छे स्रोत माने जाते हैं, जबकि वेजिटेरियन लोग सोयाबीन, दाल, पनीर और दूसरे प्लांट बेस्ड फूड्स पर निर्भर रहते हैं. लेकिन कई वेजिटेरीअन लोगों में दुविधा होती है की उनके पास प्रोटीन के लिए बहुत कम स्रोत है. ऐसे में जब भी बात सोयाबीन और चिकन की तुलना की आती है, तो सवाल उठता है कि आखिर इनमें से प्रोटीन का असली पावरहाउस कौन है? आइए जानते हैं दोनों के फायदे और पोषण के बारे में.
सोयाबीन क्यों है प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत?
जब भी शाकाहारी लोगों के सामने प्रोटीन की बात होती है उनके मन में फट से सोयाबीन की आकृति बनने लगती है. सोयाबीन को शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत माना जाता है. इसमें प्रोटीन के साथ फाइबर, विटामिन और कई जरूरी मिनरल्स भी पाए जाते हैं. सोयाबीन की खास बात यह है कि इसमें शरीर के लिए जरूरी सभी नौ आवश्यक अमीनो एसिड मौजूद होते हैं.
मांसपेशियों के लिए फायदेमंद
सोयाबीन में मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों की मरम्मत और शरीर के विकास में मदद करता है. यही वजह है कि वेजिटेरियन डाइट लेने वाले लोग इसे अपनी डाइट में शामिल करते हैं.
दिल की सेहत का रखता है ख्याल
सोयाबीन में सैचुरेटेड फैट अपेक्षाकृत कम होता है. इसमें मौजूद पॉलीअनसैचुरेटेड फैट और अन्य पोषक तत्व संतुलित डाइट का हिस्सा बन सकते हैं. हालांकि, किसी एक खाद्य पदार्थ को दिल की बीमारी का इलाज नहीं माना जा सकता.
पाचन के लिए अच्छा
सोयाबीन में फाइबर भी पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है.
बजट फ्रेंडली विकल्प
चिकन की तुलना में सोयाबीन कई लोगों के लिए सस्ता और आसानी से उपलब्ध प्रोटीन विकल्प हो सकता है. खासकर शाकाहारी लोगों के लिए यह डाइट में प्रोटीन बढ़ाने का अच्छा तरीका है.
चिकन क्यों माना जाता है हाई-क्वालिटी प्रोटीन?
चिकन, खासकर बिना त्वचा वाला चिकन ब्रेस्ट, हाई प्रोटीन और अपेक्षाकृत कम फैट वाला खाद्य पदार्थ है. इसमें शरीर के लिए जरूरी अमीनो एसिड अच्छी मात्रा में होते हैं.
मसल्स बिल्डिंग में मददगार
जिम करने या नियमित एक्सरसाइज करने वाले लोगों के लिए चिकन प्रोटीन का अच्छा स्रोत है. इसमें मौजूद अमीनो एसिड मांसपेशियों की रिकवरी और निर्माण में मदद करते हैं.
वजन नियंत्रित करने में मदद
प्रोटीन युक्त भोजन लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कर सकता है. इसलिए बिना त्वचा वाला चिकन संतुलित कैलोरी वाली डाइट में शामिल किया जा सकता है.
जरूरी पोषक तत्व
चिकन में प्रोटीन के अलावा विटामिन B6, B12, नियासिन, फॉस्फोरस और सेलेनियम जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं.
तो प्रोटीन का असली पावरहाउस कौन?
अगर केवल प्रति 100 ग्राम खाद्य पदार्थ में प्रोटीन की मात्रा की बात करें, तो तुलना इस बात पर निर्भर करती है कि सोयाबीन किस रूप में खाया जा रहा है. सूखे सोयाबीन में प्रोटीन की मात्रा काफी अधिक होती है, जबकि पकने के बाद पानी की वजह से प्रति 100 ग्राम मात्रा बदल जाती है. वहीं पके हुए चिकन में भी प्रोटीन की अच्छी मात्रा होती है. प्रोटीन की गुणवत्ता के मामले में चिकन एक हाई-क्वालिटी प्रोटीन स्रोत है, जबकि सोयाबीन भी एक महत्वपूर्ण प्लांट-बेस्ड प्रोटीन है और इसमें सभी आवश्यक अमीनो एसिड पाए जाते हैं. इसलिए किसी एक को हर व्यक्ति के लिए बेहतर कहना सही नहीं होगा.
किसे क्या चुनना चाहिए?
अगर आप नॉन-वेज खाते हैं और कम फैट के साथ प्रोटीन लेना चाहते हैं, तो बिना त्वचा वाला ग्रिल्ड, उबला या कम तेल में पका चिकन अच्छा विकल्प हो सकता है. वहीं वेजिटेरियन लोगों के लिए सोयाबीन, टोफू, दाल और पनीर प्रोटीन के अच्छे विकल्प हैं.सोयाबीन को अच्छी तरह भिगोकर और पकाकर खाना बेहतर रहता है. वहीं चिकन को डीप फ्राई करने के बजाय ग्रिल, बेक या उबालकर खाना ज्यादा बेहतर विकल्प है.
