टीएनपी डेस्क(TNP DESK): कभी हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों को बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता था. माना जाता था कि 60 साल के बाद ही दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है. लेकिन अब यह बदल रहा है. भारत में 20 से 45 साल के युवा बड़ी संख्या में दिल की बिमारी का शिकार हो रहे हैं. यह एक ऐसा खतरा है जो बिना शोर किए युवाओं की सेहत को अंदर ही अंदर कमजोर कर रहा है. यही वजह है कि इसे “साइलेंट हेल्थ क्राइसिस” कहा जा रहा है.
पिछले कुछ सालों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें पूरी तरह स्वस्थ दिखने वाले युवा अचानक हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट का शिकार हो गए. फिल्मी जगत के कई ऐसे जाने-माने लोग है जो इस साइलेंट हेल्थ क्राइसिस का शिकार हुए है. एक्टर सिद्धार्थ शुक्ला, एक्टर शेफाली जरीवाला, सिंगर केके, साउथ के एक्टर पुनीत राजकुमार, कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव की जान चली गई. बदलती जीवनशैली, मानसिक तनाव इसके प्रमुख कारण हैं. आज कल कई लोग फिट रहने के लिए जिम जाते है, वर्कआउट करते है, योग करते है अपने आप को फिट रखने के लिए घंटों पसीना बहाते है. लेकिन फिर भी कई मामले में फिट व्यक्ति की भी जान दिल की बिमारी से उनकी जान चली गई.
इसके साथ ही आज कल की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई युवाओं की शारीरिक गतिविधियां लगातार कम होती जा रही हैं, जबकि स्क्रीन टाइम और टेंशन लगातार बढ़ रहा है. लंबे समय तक बैठकर काम करना, फास्ट फूड ज्यादा खाना, एक्सरसाइज की कमी और अनटाइम खाना खाना दिल की सेहत पर बुरा असर डालते हैं. कई युवा दिन के 10 से 12 घंटे ऑफिस में बिताते हैं और उसके बाद भी मोबाइल, लैपटॉप या टीवी स्क्रीन से जुड़े रहते हैं. इससे मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं, जो आगे चलकर गंभीर हृदय रोगों का कारण बन सकती हैं.
केवल फिट दिखना स्वास्थ्य की गारंटी नहीं है. कई बार बाहर से स्वस्थ नजर आने वाले लोगों के शरीर में कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं चुपचाप विकसित हो रही होती हैं. यही कारण है कि नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी मानी जाती है. कई मामलों में पहला हार्ट अटैक ही अंतिम साबित हो जाता है क्योंकि लोगों को पहले से किसी खतरे का अंदाजा नहीं होता. हार्ट अटैक, स्ट्रोक के अधिकांश मामलों के पीछे हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड शुगर (डायबिटीज) और तंबाकू का सेवन करना. यदि समय रहते इसकी पहचान कर ली जाए तो गंभीर बीमारियों से काफी हद तक बचाव संभव है.
मानसिक तनाव भी युवाओं के दिल का बड़ा दुश्मन बनता जा रहा है. नौकरी का दबाव, आर्थिक चुनौतियां, सोशल मीडिया का प्रभाव और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंताएं मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रही हैं. वहीं देर रात तक जागना जिससे नींद पूरी ना होना भी एक बड़ा कारण हो सकता है. स्ट्रोक के मामलों में भी युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. तंबाकू, शराब इसके पीछे अहम कारण हैं. यह जोखिम खराब जीवनशैली के साथ जुड़ जाता है तो समस्या और गंभीर हो जाती है. इसलिए सीने में दर्द, सांस फूलना, थकान, चक्कर आना या हाथ और जबड़े में दर्द जैसे लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. दिल को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है. समय रहते अपनाई गई छोटी-छोटी सावधानियां भविष्य में बड़े स्वास्थ्य संकट से बचा सकती हैं.
नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है. इसमें दी गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय सलाह नहीं है. किसी भी बीमारी या लक्षण की स्थिति में कृपया डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें.
