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जोड़ों के दर्द को न समझें मामूली! जानिए गठिया के कारण, लक्षण और बचाव, जानें डॉक्टर की राय

Rashmi Prasad
Rashmi Prasad
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टीनपी डेस्क (TNP DESK): जोड़ों में दर्द, सूजन या अकड़न को अक्सर लोग बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन अगर यह परेशानी लगातार बनी रहे, चलने-फिरने में दिक्कत हो या सुबह उठने के बाद जोड़ों में ज्यादा अकड़न महसूस हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. यह गठिया यानी Arthritis का संकेत हो सकता है. गठिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के एक या कई जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न जैसी समस्या हो सकती है. यह बीमारी केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ स्थितियों में कम उम्र के लोगों को भी प्रभावित कर सकती है.

गठिया क्या होता है

गठिया एक सामान्य शब्द है, जिसका इस्तेमाल जोड़ों को प्रभावित करने वाली कई अलग-अलग बीमारियों के लिए किया जाता है. इसके अलग-अलग प्रकार हो सकते हैं. ऑस्टियोआर्थराइटिस में उम्र बढ़ने, चोट या जोड़ों पर लंबे समय तक पड़ने वाले दबाव के कारण जोड़ के बीच मौजूद कार्टिलेज धीरे-धीरे खराब हो सकता है. वहीं रूमेटाइड आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से स्वस्थ ऊतकों पर हमला करने लगती है. कुछ लोगों में यूरिक एसिड बढ़ने के कारण गाउट की समस्या भी हो सकती है. इसमें खासकर पैर के अंगूठे सहित कुछ जोड़ों में अचानक तेज दर्द, लालिमा और सूजन हो सकती है. इसलिए हर तरह के जोड़ों के दर्द को एक ही तरह का गठिया मानना सही नहीं है.

किन लोगों को ज्यादा हो सकता है खतरा

गठिया का खतरा उम्र बढ़ने के साथ बढ़ सकता है, खासकर ऑस्टियोआर्थराइटिस में. इसके अलावा अधिक वजन या मोटापा भी घुटनों और कूल्हों जैसे वजन उठाने वाले जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है. पुराने समय में लगी चोट, जोड़ों पर लगातार अधिक दबाव, कम शारीरिक गतिविधि और कुछ आनुवंशिक कारण भी जोखिम बढ़ा सकते हैं. रूमेटाइड आर्थराइटिस किसी भी उम्र में हो सकता है. वहीं गाउट का संबंध शरीर में यूरिक एसिड के बढ़े स्तर और उसके क्रिस्टल के जोड़ों में जमा होने से हो सकता है. इसलिए यदि परिवार में गठिया या अन्य जोड़ों से जुड़ी बीमारी का इतिहास है, तो लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

गठिया के प्रमुख लक्षण क्या हैं

गठिया के लक्षण उसके प्रकार और गंभीरता के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं. आम लक्षणों में जोड़ों में दर्द, सूजन, अकड़न और प्रभावित जोड़ को हिलाने में परेशानी शामिल है. कुछ लोगों को सुबह उठने के बाद काफी देर तक जोड़ों में अकड़न महसूस हो सकती है. सीढ़ियां चढ़ने, लंबे समय तक चलने या उठने-बैठने में भी परेशानी हो सकती है. अगर जोड़ अचानक बहुत ज्यादा सूज जाए, लाल हो जाए, छूने पर तेज दर्द हो या दर्द लगातार बढ़ता जाए, तो खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर है.

डॉक्टर की क्या राय है

विशेषज्ञों के मुताबिक गठिया का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज को किस प्रकार का गठिया है और उसकी स्थिति कितनी गंभीर है. डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक दर्द की दवाएं लेना सही नहीं माना जाता. सही कारण जानने के लिए डॉक्टर शारीरिक जांच के साथ जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट, एक्स-रे या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं. विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि जोड़ों को पूरी तरह निष्क्रिय रखने के बजाय मरीज की स्थिति के अनुसार हल्की और नियमित शारीरिक गतिविधि बनाए रखना फायदेमंद हो सकता है. हालांकि, किस तरह की एक्सरसाइज करनी है, यह बीमारी और मरीज की स्थिति के अनुसार डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से तय करना चाहिए.

गठिया से बचाव कैसे करें

गठिया के हर प्रकार को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन जोखिम कम करने के लिए स्वस्थ वजन बनाए रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और संतुलित आहार लेना मददगार हो सकता है. जोड़ों पर अनावश्यक दबाव डालने से बचें और किसी चोट को नजरअंदाज न करें. लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में शरीर को सक्रिय रखें. सबसे जरूरी बात यह है कि लगातार होने वाले जोड़ों के दर्द को उम्र या सामान्य थकान समझकर टालें नहीं. समय पर जांच और सही इलाज से गठिया के लक्षणों को नियंत्रित करने और रोजमर्रा की गतिविधियों को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

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