HEALTH

दिनभर की थकान के बाद भी फोन नहीं छूटता? जानिए क्या है Revenge Bedtime Procrastination और इससे बचने के आसान तरीके

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): दिनभर की भागदौड़ के बाद जब रात में बिस्तर पर जाने का समय आता है, तब कई लोगों का मन सोने के बजाय फोन चलाने, रील्स देखने या वेब सीरीज का एक और एपिसोड देखने का करता है. शरीर थका होता है, आंखों में नींद होती है, लेकिन फिर भी लगता है कि दिन में अपने लिए समय नहीं मिला, इसलिए रात का थोड़ा वक्त खुद को देना जरूरी है. इसी वजह से सोने का समय लगातार आगे खिसकता जाता है और देखते ही देखते रात के 12 या 1 बज जाते हैं. इस आदत को Revenge Bedtime Procrastination कहा जाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह केवल मोबाइल की आदत से जुड़ी समस्या नहीं है. इसके पीछे दिनभर की व्यस्तता और अपने लिए समय की कमी भी बड़ी वजह हो सकती है.

दिनभर खुद के लिए समय नहीं मिलता तो रात बन जाती है ‘अपना वक्त’
सुबह जल्दी उठने से लेकर ऑफिस, ट्रैफिक, घर के काम, बच्चों की जिम्मेदारियों और लगातार आने वाले फोन और मैसेज के बीच कई लोगों का पूरा दिन निकल जाता है. ऐसे में रात को जब सभी जिम्मेदारियां खत्म होती हैं, तब व्यक्ति को लगता है कि अब कुछ समय सिर्फ अपने लिए होना चाहिए. कोई किताब पढ़ना चाहता है, कोई संगीत सुनता है, कोई सोशल मीडिया चलाता है तो कोई अपनी पसंदीदा सीरीज देखने बैठ जाता है. शुरुआत में यह कुछ मिनटों की बात होती है, लेकिन धीरे-धीरे यही समय घंटों में बदल सकता है. समस्या तब बढ़ती है जब यह रोज का पैटर्न बन जाए. हर रात नींद का एक घंटा कम होना भले ही तुरंत बड़ी परेशानी न लगे, लेकिन लगातार ऐसा होने पर शरीर में Sleep Debt बढ़ सकता है. इसका असर अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन, सुस्ती और एकाग्रता पर पड़ सकता है.

इस आदत में एक खास तरह का चक्र बन सकता है. दिनभर काम के कारण थकान होती है, लेकिन रात में अपने लिए समय निकालने की इच्छा नींद पर भारी पड़ जाती है. देर से सोने के कारण अगली सुबह पर्याप्त आराम नहीं मिलता और दिनभर फिर थकान महसूस होती है. इसके बावजूद रात होते ही व्यक्ति दोबारा सोचता है कि दिनभर तो काम में निकल गया, अब थोड़ा समय खुद के लिए होना चाहिए. इसी तरह नींद लगातार पीछे खिसकती रहती है.

फोन इस आदत को और बढ़ा सकता है
सोने से पहले मोबाइल देखना अपने आप में समस्या नहीं है, लेकिन फोन का लगातार इस्तेमाल सोने का समय बिगाड़ सकता है. एक रील देखने के बाद दूसरी रील सामने आ जाती है. एक वीडियो खत्म होते ही दूसरा शुरू हो जाता है. इसी तरह मैसेज, सोशल मीडिया अपडेट और वेब सीरीज भी व्यक्ति को स्क्रीन से दूर होने नहीं देते. नतीजा यह होता है कि सोने की तैयारी का समय लगातार आगे बढ़ता जाता है और व्यक्ति को पता ही नहीं चलता कि कब देर रात हो गई.

इस आदत से छुटकारा पाने के लिए क्या करें?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आप रात में देर तक जागना क्यों चाहते हैं. अगर दिनभर में अपने लिए बिल्कुल समय नहीं मिल रहा है, तो अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे ब्रेक शामिल करें.
20 से 30 मिनट की वॉक, किताब पढ़ना, संगीत सुनना या परिवार के साथ बिना मोबाइल के बैठना भी मददगार हो सकता है. इससे रात में ‘अपने लिए समय’ निकालने का दबाव कम किया जा सकता है.
सोने और उठने का समय भी लगभग नियमित रखने की कोशिश करें. अगर अभी बहुत देर से सोते हैं तो अचानक काफी जल्दी सोने के बजाय धीरे-धीरे बेडटाइम पहले करना ज्यादा आसान हो सकता है.
अगर मोबाइल सबसे बड़ा डिस्ट्रैक्शन है तो उसे बिस्तर से थोड़ी दूरी पर रखें. सोने से पहले अगले दिन के जरूरी काम लिख लेना भी फायदेमंद हो सकता है. इससे दिमाग बार-बार पेंडिंग कामों के बारे में सोचने से बच सकता है.

हर देर रात तक जागने वाला व्यक्ति किसी स्लीप डिसऑर्डर से परेशान हो, ऐसा जरूरी नहीं है. लेकिन अगर पर्याप्त समय देने के बावजूद नींद नहीं आती, रात में बार-बार नींद टूटती है, दिन में अत्यधिक नींद आती है या लंबे समय तक थकान और ध्यान लगाने में परेशानी बनी रहती है, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है. आखिरकार, रात का समय अपने लिए निकालना गलत नहीं है, लेकिन अगर इसकी कीमत लगातार नींद कम करके चुकानी पड़ रही है तो अपनी दिनचर्या पर ध्यान देने की जरूरत है. नींद को दिन के अंत में बचा हुआ समय नहीं, बल्कि रोज की जरूरी जरूरत समझना ज्यादा बेहतर है.

TagsHEALTH