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क्या आप भी खाते हैं पिज़्ज़ा और बर्गर तो हो जाएं सतर्क! शराब नहीं ये फूड बन रहे हैं फैटी लिवर की बड़ी वजह

Rashmi Prasad
Rashmi Prasad
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टीनपी डेस्क (TNP DESK): आज के दौर में पीज़ा-बर्गर खाना किसे पसंद नहीं होता. कोई कभी-कभी खाना पसंद करता है तो कई लोग तो ऐसी भी होते है जो अपने रूटीन मे ही फास्ट फूड को शामिल कर लेते है. इन सब के वजह से कई बीमारियाँ आपको घेर लेती है और आपके शरीर को धीरे धीरे खोखला करने लगती है. आपको जानकर हैरानी होगी की भारतवर्ष में इतनी तेजी से फैटी लिवर की समस्या बढ़ रही है जितनी तेजी से एक इंसान पिज्जा बर्गर का सेवन कर रहा है और चिंता की बात यह है कि कई लोगों को ऐसा लगता है की शराब पीने वाले को ही फैटी लिवर की समस्या होती है तो आप गलत है. इसके शिकार केवल शराब पीने वाले लोग ही नहीं हैं. आज बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) से पीड़ित हैं, जो कभी शराब का सेवन नहीं करते. विशेषज्ञों के अनुसार खराब खानपान, बढ़ता मोटापा, फास्ट फूड की आदत और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारण हैं. मेडिकल जर्नल द लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार भारत में लगभग 39 प्रतिशत वयस्क नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज से प्रभावित हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समस्या पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं.

दिल्ली AIIMS के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और ह्यूमन न्यूट्रिशन विभाग के प्रोफेसर डॉ. शालीमार के अनुसार जब लिवर में 5 प्रतिशत से अधिक वसा जमा हो जाती है तो उसे फैटी लिवर कहा जाता है. यह लिवर खराब होने की शुरुआती अवस्था होती है. आमतौर पर लोग मानते हैं कि फैटी लिवर केवल शराब पीने वालों को होता है, लेकिन अब नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इसका सबसे बड़ा कारण असंतुलित और अस्वस्थ खानपान है. अधिक तेल, घी और मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन लिवर में अतिरिक्त फैट जमा करने लगता है, जिससे धीरे-धीरे यह बीमारी विकसित होती है.

विशेषज्ञ बताते हैं कि फास्ट फूड भी लिवर के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है. बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज, प्रोसेस्ड स्नैक्स और शुगर युक्त ड्रिंक्स का अधिक सेवन शरीर में सूजन बढ़ाता है और आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाता है. जब आंतों का संतुलन बिगड़ता है तो उसका सीधा असर लिवर पर पड़ता है. इसके अलावा कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक दर्द निवारक या अन्य दवाओं का सेवन करते रहते हैं, जिससे लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है.

एक बड़ी गलतफहमी यह भी है कि केवल मोटे लोगों को ही फैटी लिवर होता है. डॉक्टरों के अनुसार पतले और सामान्य वजन वाले लोग भी इस बीमारी का शिकार हो सकते हैं. यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से जंक फूड, अधिक चीनी और तैलीय भोजन का सेवन करता है तथा शारीरिक गतिविधियां कम करता है, तो उसका लिवर भी प्रभावित हो सकता है. हाल के वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां पतले लोगों में भी फैटी लिवर और अन्य लिवर संबंधी समस्याएं पाई गई हैं.

लिवर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त पानी का सेवन और अनावश्यक दवाओं से बचना बेहद जरूरी है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फलों, हरी सब्जियों, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त भोजन को अपनी डाइट में शामिल करें. साथ ही समय-समय पर स्वास्थ्य जांच भी कराते रहें, ताकि लिवर से जुड़ी किसी भी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके. सही खानपान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर फैटी लिवर जैसी गंभीर बीमारी से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है.

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