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फ्रिज का ठंडा दूध या गुनगुना दूध? रात में सोने से पहले सेहत के लिए क्या है बेहतर, जानिए

Rashmi Prasad
Rashmi Prasad
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टीएनपी डेस्क (TNP DESK): अक्सर ऐसा देखा गया है कि कई लोगों के घर रात में सोने से पहले दूध पीना पसंद करते है. ये आदत भारतीय घरों में लंबे समय से चली आ रही है. कई लोग मानते हैं कि गुनगुना दूध पीने से नींद जल्दी आती है, जबकि कुछ लोग सीधे फ्रिज से निकला ठंडा दूध पीना पसंद करते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर रात में सोने से पहले ठंडा दूध बेहतर है या गुनगुना दूध? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दूध का तापमान अपने आप में सेहत पर बहुत बड़ा फर्क नहीं डालता. हालांकि, गुनगुना दूध कुछ लोगों को आराम और रिलैक्स महसूस कराने में मदद कर सकता है.

गुनगुना दूध क्यों माना जाता है बेहतर?

गुनगुना दूध पीने की सलाह अक्सर इसलिए दी जाती है क्योंकि गर्म पेय रात में शरीर और दिमाग को रिलैक्स करने वाली दिनचर्या का हिस्सा बन सकता है. दूध में ट्रिप्टोफैन और कुछ मात्रा में मेलाटोनिन जैसे घटक पाए जाते हैं, जो नींद से जुड़े जैविक तंत्र में भूमिका निभाते हैं. हालांकि, सामान्य मात्रा में दूध से मिलने वाला ट्रिप्टोफैन या मेलाटोनिन इतना अधिक नहीं होता कि इसे नींद की दवा माना जाए. विशेषज्ञों के अनुसार, गुनगुने दूध का फायदा काफी हद तक उसके शांत करने वाले असर और नियमित bedtime routine से जुड़ा हो सकता है.

क्या ठंडा दूध नुकसानदायक है?

अगर आपको ठंडा दूध पीने से कोई परेशानी नहीं होती, तो इसे पीना अपने आप में नुकसानदायक नहीं माना जाता. अभी ऐसा मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है जो यह साबित करे कि रात में ठंडा दूध पीने से नींद खराब होती है या गुनगुना दूध निश्चित रूप से उससे बेहतर है. असल में दूध के तापमान की तुलना करके नींद पर असर देखने वाले पर्याप्त अध्ययन उपलब्ध नहीं हैं. इसलिए व्यक्ति की पसंद और शरीर की प्रतिक्रिया ज्यादा मायने रखती है. किसी को ठंडा दूध आसानी से पच जाता है, जबकि किसी दूसरे व्यक्ति को रात में ठंडा पेय लेने के बाद पेट में असहजता महसूस हो सकती है.

दूध में मौजूद पोषक तत्व भी हैं महत्वपूर्ण

दूध सिर्फ नींद के लिए ही नहीं, बल्कि प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन B2, B12, पोटैशियम और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्वों का स्रोत भी है. इसलिए अगर कोई व्यक्ति रात में दूध पीता है और उसे इससे पाचन संबंधी परेशानी नहीं होती, तो सीमित मात्रा में इसे अपनी डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है. हालांकि, हर व्यक्ति के लिए रोज रात दूध पीना जरूरी नहीं है. संतुलित डाइट में कैल्शियम और प्रोटीन के दूसरे स्रोत भी शामिल किए जा सकते हैं.

सोने से कितनी देर पहले पिएं दूध?

अगर आप रात में दूध पीना पसंद करते हैं तो सोने से ठीक पहले बहुत ज्यादा मात्रा में दूध पीने से बचना बेहतर है. एक छोटी मात्रा पर्याप्त हो सकती है. बहुत ज्यादा खाना या पीना सोने के समय पेट को भरा हुआ महसूस करा सकता है और कुछ लोगों में नींद प्रभावित हो सकती है. हार्वर्ड हेल्थ भी सोने से दो-तीन घंटे पहले भारी भोजन से बचने और जरूरत होने पर हल्का स्नैक लेने की सलाह देता है.

किन लोगों को रात में दूध से सावधान रहना चाहिए?

लैक्टोज इनटॉलरेंस वाले लोगों को दूध पीने के बाद गैस, पेट फूलना, ऐंठन या दस्त जैसी समस्या हो सकती है. वहीं कुछ लोगों में रात के समय दूध लेने से एसिडिटी या रिफ्लक्स की समस्या बढ़ सकती है. ऐसे लोगों के लिए दूध का तापमान बदलने के बजाय lactose-free milk या डॉक्टर की सलाह के अनुसार दूसरे विकल्प बेहतर हो सकते हैं. दूध से एलर्जी वाले लोगों को इसे नहीं लेना चाहिए.

तो आखिर ठंडा या गुनगुना दूध?

अगर बात सिर्फ रात में सोने से पहले दूध के तापमान की हो, तो गुनगुना दूध एक बेहतर व्यावहारिक विकल्प हो सकता है, खासकर अगर इससे आपको आराम महसूस होता है. लेकिन इसे ठंडे दूध से वैज्ञानिक रूप से ज्यादा फायदेमंद या नींद लाने वाला साबित नहीं किया गया है. सबसे जरूरी बात यह है कि दूध आपको सूट करता हो, मात्रा सीमित हो और आपकी पूरी नींद की दिनचर्या अच्छी हो. नियमित सोने का समय, रात में कैफीन से दूरी, कम स्क्रीन टाइम और शांत वातावरण नींद के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हैं.

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