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रात का खाना कितने बजे खाना चाहिए? देर से डिनर करने का सेहत पर क्या पड़ता है असर! जाने डॉक्टर की राय

Rashmi Prasad  CE
Rashmi Prasad CE
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टीनपी डेस्क (TNP DESK): आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में देर रात खाना खाना एक आम आदत बन गई है. ऑफिस से देर से लौटना, पढ़ाई, ट्रैफिक, मोबाइल या देर रात तक जागने की वजह से कई लोग रात का खाना 10 से 11 बजे या उससे भी बाद खाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि डिनर का समय आपकी सेहत पर कितना असर डाल सकता है? विशेषज्ञों के अनुसार, सिर्फ यह मायने नहीं रखता कि आप क्या खा रहे हैं, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि आप खाना किस समय खा रहे हैं. देर रात भारी भोजन करने से पाचन, नींद और वजन से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं.

देर से खाना क्यों पड़ सकता है भारी?

हमारे शरीर की जैविक घड़ी यानी सर्केडियन रिदम दिन और रात के हिसाब से शरीर की कई प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती है. रात में शरीर धीरे-धीरे आराम की स्थिति में जाने लगता है. ऐसे में बहुत देर से और ज्यादा मात्रा में खाना खाने पर पाचन प्रक्रिया के साथ नींद भी प्रभावित हो सकती है. खासकर अगर डिनर के तुरंत बाद बिस्तर पर चले जाएं, तो पेट में भारीपन, एसिडिटी और सीने में जलन जैसी समस्या महसूस हो सकती है. इसलिए देर रात खाने की आदत को रोजाना का हिस्सा बनाने के बजाय भोजन और सोने के बीच पर्याप्त अंतर रखना बेहतर माना जाता है.

सही समय क्या हो सकता है?

डिनर का कोई एक समय हर व्यक्ति के लिए तय नहीं किया जा सकता, क्योंकि काम का समय, सोने-जागने की दिनचर्या और जीवनशैली अलग-अलग होती है. सामान्य तौर पर रात का खाना सोने से करीब 2 से 3 घंटे पहले खत्म करना एक व्यावहारिक तरीका माना जाता है. उदाहरण के लिए, अगर आप रात 11 बजे सोते हैं तो कोशिश कर सकते हैं कि डिनर 8 से 9 बजे के बीच पूरा हो जाए. इससे शरीर को भोजन पचाने के लिए समय मिल सकता है और खाना खाने के तुरंत बाद लेटने की स्थिति से बचा जा सकता है.

देर रात खाना और वजन का कनेक्शन

देर रात खाना अपने आप में वजन बढ़ने का एकमात्र कारण नहीं है. वजन पर कुल कैलोरी, भोजन की गुणवत्ता, शारीरिक गतिविधि और नींद समेत कई चीजों का प्रभाव पड़ता है. हालांकि, देर रात खाने की आदत अक्सर ज्यादा कैलोरी वाले स्नैक्स, मीठे खाद्य पदार्थ या तले-भुने भोजन के सेवन से जुड़ जाती है. रात में कम गतिविधि होने के कारण अतिरिक्त कैलोरी खर्च करना भी मुश्किल हो सकता है. इसलिए अगर रात में भूख लगती है तो हल्का और संतुलित विकल्प चुनना बेहतर हो सकता है.

नींद पर भी पड़ सकता है असर

सोने से ठीक पहले भारी भोजन करने से कुछ लोगों को नींद आने में परेशानी हो सकती है. मसालेदार, बहुत तला हुआ या अत्यधिक वसायुक्त खाना पेट में असहजता और एसिड रिफ्लक्स को बढ़ा सकता है. वहीं, पर्याप्त नींद न मिलने से अगले दिन थकान और खाने की आदतों पर भी असर पड़ सकता है. इसलिए अच्छी नींद के लिए सिर्फ सोने का समय ही नहीं, बल्कि सोने से पहले भोजन का समय और मात्रा भी महत्वपूर्ण हो सकती है.

डिनर में क्या रखें ध्यान?

रात के खाने को हल्का, संतुलित और जरूरत के मुताबिक रखना बेहतर है. सब्जियां, दाल, पर्याप्त प्रोटीन और उचित मात्रा में साबुत अनाज जैसे विकल्प शामिल किए जा सकते हैं. बहुत ज्यादा तला-भुना, अत्यधिक मसालेदार और भारी भोजन कम करना उपयोगी हो सकता है. खाने के बाद तुरंत बिस्तर पर जाने के बजाय कुछ देर सामान्य गतिविधि करना भी मददगार हो सकता है. अगर किसी व्यक्ति को बार-बार एसिडिटी, सीने में जलन, पेट की परेशानी या नींद से जुड़ी समस्या होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.

सिर्फ समय नहीं, पूरी दिनचर्या है जरूरी

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि एक निश्चित समय के बाद खाना हमेशा नुकसानदायक है. असल बात आपकी पूरी दिनचर्या, भोजन की मात्रा और सोने के समय के बीच का अंतर है. कोशिश करें कि रोजाना डिनर का समय बहुत ज्यादा न बदले और सोने से कुछ घंटे पहले भोजन पूरा हो जाए. साथ ही नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं. यानी रात का खाना जल्दी और संतुलित रखना अच्छी आदत है, लेकिन सेहत के लिए सबसे जरूरी है नियमित और संतुलित लाइफस्टाइल.

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