धनबाद(DHANBAD): धनबाद जब बिहार में था, तब धनबाद में खाद्य सामग्रियों की जांच के लिए प्रयोगशाला थी. लेकिन जब धनबाद झारखंड में आ गया, तो प्रयोगशाला बंद हो गई. मतलब 29 लाख से भी अधिक लोगों के खाद्य सामग्रियों की जांच के लिए धनबाद में कोई प्रयोगशाला नहीं है. बिहार के समय में अभी के झमाडा परिसर में प्रयोगशाला थी. यह अलग बात है कि खाद्य सुरक्षा विभाग सैंपल लेता है और उसे रांची भेजता है. ऐसे में वक्त भी अधिक लगता है और देरी की वजह से रिपोर्ट भी सही नहीं मिलने की आशंका रहती है. पूर्व वार्ड पार्षद निर्मल कुमार मुखर्जी ने इस मामले को मानवाधिकार आयोग के सामने मजबूती से उठाया है.
धनबाद में 29 लाख लोगो की खाद्य सामग्रियों की जांच को नहीं है प्रयोगशाला
उन्होंने कहा है कि 29 लाख से भी अधिक लोगों के खाने की सामग्रियों की जांच के लिए प्रयोगशाला नहीं होना, दुर्भाग्यपूर्ण बात है. निर्मल मुखर्जी का कहना है कि मीट- मछली की दुकानों में काटने के लिए प्रयुक्त हथियार "अप टू मार्क" नहीं होते है. इसकी कभी जांच -पड़ताल नहीं की जाती. सबसे बड़ी समस्या है कि खाद्य सुरक्षा विभाग बगैर जाँच के कह देता है कि हथियार सही नहीं है, जबकि इसकी प्रयोगशाला में जांच होनी चाहिए और उसकी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए.
पूर्व वार्ड पार्षद निर्मल कुमार मुखर्जी ने मानवाधिकार से की है शिकायत
निर्मल मुखर्जी ने मानवाधिकार आयोग को शिकायत की है कि धनबाद के फूड सेफ्टी ऑफिसर ने जो 28. 6. 25 को रिपोर्ट दी है. उसमें कई गड़बड़ियो की शिकायत की है. उन्होंने कहा है कि मीट और मछली की दुकानों पर नियम का पालन नहीं किया जा रहा है. साफ- सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसे जहां जी चाहता, मांस -मछली बेच रहा है. यह मानव जीवन के साथ खिलवाड़ है. उन्होंने मानवाधिकार आयोग से शिकायत की है कि हथियारों की प्रॉपर सैंपलिंग नहीं की जाती और न हीं इसकी प्रयोगशाला में जांच की जाती. धनबाद में प्रयोगशाला नहीं होने की बात भी उन्होंने कही है. निर्मल मुखर्जी की शिकायत पर धनबाद के डीसी को निर्देश दिया गया है कि इस शिकायत पर कार्रवाई हो और उसका एक्शन टेकन रिपोर्ट भेजा जाए. यह अलग बात है कि फूड सेफ्टी ऑफिसर ने अभी हाल ही में शहर के दो-तीन जगहों पर निरीक्षण किया था.
धनबाद में सब स्टैंडर्ड हथियारों का हो रहा प्रयोग,नियमो का नहीं हो रहा पालन
उन्होंने भी पाया था कि अभी भी लोहे के औजार से मांस मछली काटे जा रहे है, जबकि यह स्टील का होना चाहिए. उन्होंने चार दुकानों को नोटिस भी दिया है, लेकिन यह कार्रवाई फिर आगे नहीं बढ़ी और अभी भी लोग सड़क के किनारे, नालियों के बगल के प्रदूषण मांस -मछली का सेवन कर रहे है. निर्मल मुखर्जी ने इसे मानवाधिकार का हनन बताया है. स्वास्थ्य के लिए खतरा भी बताया है. कहा है कि धनबाद झारखंड का महत्वपूर्ण जिला है, यहां प्रयोगशाला नहीं होना, सबको चौंका रहा है. उन्होंने झारखंड सरकार से भी मांग की है कि प्रयोगशाला धनबाद में खुले. आश्चर्य की बात है कि जनप्रतिनिधि भी इस महत्वपूर्ण मामले में कोई आवाज नहीं उठाते. जबकि वह भी सड़क से गुजरते हैं और दुर्गंध से नाक पर रूमाल रख लेते हैं, फिर भी इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनकी शिथिलता बनी हुई है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
