रांची(RANCHI): झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है. कभी झोले में विभाग का जनाजा दिखता है तो कभी खाट पर सिस्टम की हकीकत. लेकिन इन सब से दूर सूबे के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी दूसरे राज्य में ताक झांक कर सुर्खियां बटोरने में लगे है. बेशर्मी ऐसी की झोले में शव के मामले पर सवाल पूछिए तो कार्रवाई के बजाए बच्चे का शव चार साल का था या चार माह का इसपर पक्ष दे रहे है. अपने राज्य के स्वास्थ्य विभाग को दुरुस्त करने के बजाए पिता के उम्र के नीतीश कुमार का इलाज करने की बात कर रहे है.
चलिए सबसे पहले पूरा मामला समझाते है. बिहार में आयुष चिकित्सक को नियुक्ति पत्र देने के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का हिजाब खींचने का मामला सुर्खियों में है. देश-विदेश तक चर्चा हो रही है. इस चर्चे में अब झारखंड के बड़बोले मंत्री इरफान अंसारी भी कूद गए. जबकि डॉ साहब को झारखंड की व्यवस्था पर भी देखने की जरूरत थी. हर जगह राजनीतिक सही नहीं होती है.
अब नीतीश कुमार की ही बात कर लेते है. नीतीश कुमार ने किस मंशा से उनका नकाब उठाया. हो सकता है नीतीश कुमार अपनी बेटी समझते हुए उस लड़की का नकाब उठाया होगा. लेकिन कुछ नेता ने इसे मुद्दा बना लिया और हंगामा शुरू हुआ. नीतीश कुमार को बीमार बताते हुए इलाज की बात करने लगे. इसमें भी मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि फ्री में इलाज करेंगे.
अब मंत्री जी के इलाज वाले बयान की हक़ीक़त देख लेते है. पहली तस्वीर चाईबासा की दिखा रहे है. इस तस्वीर में चार माह के बच्चे का शव झोले में लेकर जाने को एक पिता मजबूर हुआ. इसके मौत के बाद शव वाहन नहीं मिला. चलिए यह भी छोड़िए दूसरी तस्वीर देखिए यह गुमला की है. यहां खाट पर एक आदिम जनजाति की महिला को ले जाया जा रहा है. आखिर में दम तोड़ देती है. ऐसे न जानें कितनी तस्वीर दिखाए जिससे राज्य के मंत्री की नींद टूटे, इन सब को ठीक करने के बजाए मंत्री जी बिहार के मुख्यमंत्री का इलाज करने की बात कर रहे है.
अब नीतीश कुमार अगर बीमार ही है तो मंत्री इरफान के पिता के उम्र के है और इरफान अंसारी के पिता फुरकान अंसारी के साथ उनकी राजनीति शुरू हुई, या उससे भी पहले लेकिन इस तरह से टिपण्णी करना कितना सही है. वैसे भी कहा जाता है कि पिता अगर थोड़ा गड़बड़ा भी जाता है तो बाप-बाप होता है. उसे इस तरह से बेइज्जत बेटा नहीं करता है.
अब पूरे मामले में देखें तो खुद झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी पल्ला झाड़ा है. उस बयान के साथ डॉ को नौकरी देने के मामले में साफ किया है कि वह उनका व्यक्तिगत फैसला हो सकता है. गठबंधन या सरकार का नहीं. ऐसे में खुद कांग्रेस की लंका तो लगा ही रहे है साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भी फजीहत कराने में लगे है.
