धनबाद (DHANBAD) : कोयलांचल की राजनीति कोयले की चमक से "चमकती " है. इसमें किसी को कोई संशय हो ही नहीं सकता. इधर, धनबाद की राजनीति अब बदल रही है. कई पति-पत्नियों की जोड़ी लगातार सक्रिय है. इसमें तीन जोड़ी की चर्चा तो खूब हो रही है. पहले जोड़ी है सांसद ढुल्लू महतो और उनकी पत्नी सावित्री देवी की, तो दूसरी जोड़ी है बेरमो के विधायक अनूप सिंह और उनकी पत्नी अनुपमा सिंह की, तीसरी जोड़ी के रूप में झरिया की विधायक रागिनी सिंह और उनके पति पूर्व विधायक संजीव सिंह का नाम गिनाया जा रहा है. चलिए-हम आपको बताते हैं कि इन जोड़ी की गतिविधियां धीरे-धीरे कैसे बढ़ रही है. तीनों जोड़ी प्रत्यक्ष रूप से कोयला मजदूर संगठन से जुड़ी हुई है.
धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो एटक की राजनीति कैसे करते है
धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो एटक की राजनीति करते है. भाजपा में हैं लेकिन मजदूरों की राजनीति लाल झंडे में रहकर करते है. उनकी पत्नी सावित्री देवी भी पूरी तरह से सक्रिय है. धनबाद से लेकर बोकारो तक उनकी सक्रियता देखी जाती है. सांसद की अनुपस्थिति में वह कार्यक्रम में हिस्सा भी लेती है. चर्चा तो यह भी है कि वह मेयर चुनाव लड़ सकती हैं, हालांकि भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी में कह दिया है कि ऐसा मत कीजिए, क्योंकि वह खुद भजपा के सांसद है , उनके भाई भाजपा के विधयक है. खैर, सांसद ढुल्लू महतो की पत्नी सावित्री देवी की राजनीतिक सक्रियता फिर एक बार बढ़ गई है. पहले यह सक्रियता केवल धनबाद जिले में थी, लेकिन अब यह बोकारो जिले तक पहुंच गई है. शुक्रवार को सांसद खेल महोत्सव का आयोजन सिंदरी विधानसभा क्षेत्र में किया गया. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा सांसद ढुल्लू महतो की पत्नी सावित्री देवी मौजूद थी. दूसरी ओर चंदनकियारी में भी इसी महोत्सव का आयोजन किया गया. जिसमें सावित्री देवी ने भाग लिया और पूर्व मंत्री अमर कुमार बाउरी के साथ खेल महोत्सव का शुभारंभ किया.
सावित्री देवी की सक्रियता धनबाद से आगे बोकारो तक पहुंच गई है
सावित्री देवी की सक्रियता धनबाद से आगे निकलकर बोकारो तक पहुंच गई है और इसकी चर्चाएं खूब हो रही है. अब अगर बेरमो के विधायक अनूप सिंह की बात की जाए, तो अनूप सिंह की पत्नी अनुपमा सिंह तो 2024 में धनबाद लोकसभा से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुकी है. अभी भी वह धनबाद की राजनीति में सक्रिय है. जगह-जगह कार्यक्रमों में हिस्सा ले रही है. कहा जा रहा है कि धनबाद के मजदूर संगठन की राजनीति में अब धीरे-धीरे उनका प्रवेश होगा. वैसे ,बेरमो के मजदूर संगठनों की राजनीति में अनूप सिंह तो पहले से ही सक्रिय है. यह अलग बात है कि अनूप सिंह के पिता और कांग्रेस के कद्दावर नेता राजेंद्र बाबू कोयला मजदूरों की राजनीति कर कई पदों को सुशोभित किया. उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में अनूप सिंह पहली बार विधायक बने और अब उनकी सक्रियता लगातार बढ़ रही है. इधर, अनूप सिंह धनबाद में सक्रियता बढ़ाये हुए हैं, तो सांसद ढुल्लू महतो बोकारो में सक्रिय हो गए हैं और इस वजह से दोनों में राजनीतिक टकराव भी चल रहा है.
सिंह मेन्शन का भी हाल जान लीजिये, क्या होने जा रहा
अब अगर बात की जाए सिंह मेंशन की तो सूर्य देव सिंह के दूसरे बेटे पूर्व विधायक संजीव सिंह 8 साल से अधिक समय के बाद अपने चचेरे भाई कांग्रेस नेता रहे नीरज सिंह हत्याकांड में बरी होकर जेल से बाहर आए है. उनके जेल रहते हुए पत्नी रागिनी सिंह ने भाजपा सहित मजदूर संगठन की राजनीति करती रही और नतीजा हुआ कि 2024 के विधानसभा चुनाव में वह अपनी गौतनी पूर्णिमा नीरज सिंह को हराकर विधायक बनी है. अब संजीव सिंह चुकि जेल से बाहर आ गए हैं और उनमें भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा हिलोरे मार रही हैं, तो समझा जा रहा है कि संजीव सिंह अब मजदूर संगठन की डोर पड़कर आगे की राजनीति करेंगे. वैसे भी मजदूर संगठनों की राजनीति कोयलांचल में "मजबूती" का आधार होता है. राजनीतिक पंडित बता रहे हैं कि कोयलांचल की राजनीति अब बदल रही है. पति-पत्नियों की जोड़ी की धमक बढ़ रही है.
रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो
