टीएनपी डेस्क(TNP DESK):नौकरी किसी के लिए भी काफी महत्पूर्ण होती है. हाथ से नौकरी जाना किसी के लिए भी बड़ा झटका है.जैसी ही नौकरी जाती है लोगों को भविष्य की चिंता सताने लगती है.वही महीने के खर्चे सोचकर लोगों का दिमाग खराब हो जाता है. कई बार ऐसा देखा जाता है कि लोग खुद से ही किसी कारणवश इस्तीफा दे देते है तो वहीं कई बार ऐसा होता है कि कंपनी की ओर से किसी कारण को लेकर कर्मचारी को ऑफिस से निकल दिया जाता है.नौकरी से निकाले जाने के लिए भी कानून बनाया गया, जहां आपको एक से तीन महीने तक का नोटिस दिया जाता है और आपको बताया जाता है कि आपको किस वजह से नौकरी से निकाला जा रहा है.वही कई बार ऐसा देखा जाता है कि बिना सूचना कंपनी नौकरी से निकल देती है ऐसे में लोगों को समझ नहीं आता कि वह करें तो क्या करें.
कर्मचारियों के लिए भी अधिकार सुरक्षित
आपको बता दें कि भारतीय कानून में कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी अधिकार सुरक्षित रखे गए है, जहां यह कहा गया है कि किसी भी कर्मचारी को बिना वजह बताए और एक से तीन महीने का नोटिस दिये आपको नहीं निकला जा सकता है. अगर कोई कंपनी ऐसा करती है तो यह कानूनी रूप से गलत है और कंपनी के खिलाफ आप कानूनी कार्रवाई कर सकते है क्योंकि किसी को भी गलत तरीके से नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं है.यदि आपके साथ भी ऐसा कुछ हो रहा है तो आपको अपने कानून अधिकारों की जानकारी जरूर होनी चाहिए जो हम आपको आज देनेवाले है.
कर्मचारी को निकालने से पहले वैद्य नोटिस देना जरुरी
कानून के अनुसार किसी भी कंपनी को कर्मचारी को निकालने से पहले वैद्य नोटिस देना होता है. अगर कंपनी चाहती है कि तुरंत नौकरी से निकाला जाए तो नोटिस अवधि के बराबर का वेतन कंपनी भुगतान करती है.इसके साथ ही आपको बिना वजह बताए किसी कर्मचारी को निकालने का अधिकार नहीं है अगर आप किसी को भी नौकरी से निकाल रहे है तो आपको उसको नौकरी से निकलने का कानूनी वज़ह बताना पड़ेगा कंपनी को लिखित रूप से termination latter देना जरूरी है. जिसमे साफ-साफ लिखा होना चाहिए कि आपको खराब प्रदर्शन, के धोखा या कंपनी की नीति का उल्लंघन, अनुशासनहीनता की वजह से निकाला जा रहा है.
कारण बताना है जरूरी
यदि आपके ऊपर कंपनी ने धोखाधडी गलत आचरण या अन्य किसी बात का गंभीर आरोप लगाया है तो कंपनी की ओर से आपको अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाना चाहिए जो आपका अधिकार है.वही नौकरी से निकाले जाने पर कर्मचारी को उसका बकाया वेतन, पीएफ, छुट्टी का भुगतान, बोनस आदि भुगतान करना होता है और अंतिम निपटान करके ही उसे नौकरी से निकालना जाना चाहिए.
कानून का ले सकते हैं सहारा
यदि आपको लगता है कि आपको बिना वजह नौकरी से निकाला गया है तो आप औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 का सहारा ले सकते हैं .इस नियम के अनुसार कोई कर्मचारी 240 दिन से अधिक किसी कंपनी में काम कर चुका है तो उसको बिना उचित कारण निकालना गलत है.यदि कर्मचारी चाहे तो इसके खिलाफ कोर्ट जा सकता है और अपना हक मांग सकता है.वही जितने दिन केस चलता है उतने दिन तक का वह हरजाना का दावा कर सकता है.यदि आपको कभी कंपनी की ओर से अचानक नौकरी से निकाल दिया जाए तो आपको घबराने की ज़रूरत नहीं है.
