पटना(PATNA):बिहार की राजनीति में एक बार फिर राज्य के खजाने और सरकारी निर्णयों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए है. शक्ति यादव के हालिया बयान ने राज्य की वित्तीय स्थिति और सरकार की नीतियों पर बहस छेड़ दी है.शक्ति यादव ने कहा कि बिहार पर तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है. ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह राज्य के खजाने की वास्तविक स्थिति को जनता के सामने रखे, उन्होंने मांग की कि बिहार सरकार श्वेत पत्र (White Paper) जारी करे, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि योजनाओं पर कितना खर्च हुआ और कितनी राशि अभी उपलब्ध है.
महिलाओं को दी जा रही सहायता राशि पर भी सवाल उठाए
महिलाओं को दी जा रही सहायता राशि पर भी सवाल उठाए.यदि 10 हजार महिलाओं को सहायता दी गई है और प्रत्येक को दो लाख रुपये देने की योजना है, तो इसके लिए लगभग दो लाख सत्तर हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता पड़ेगी. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इतनी बड़ी राशि कहां से आएगी.शक्ति यादव ने कहा कि यह केवल राजनीति का नहीं, बल्कि बिहार के खजाने से जुड़ा सवाल है, जिस पर राज्य की हर जनता का हक है. सरकार को योजनाओं की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए.
क्यों तोड़ा गया बिहार निवास भवन
उन्होंने बिहार निवास भवन को तोड़े जाने के निर्णय पर भी सवाल उठाए. यह भवन मात्र 32 वर्ष पुराना है, फिर इसे तोड़ने का फैसला क्यों लिया गया? उन्होंने पूछा कि क्या यह भवन इसलिए तोड़ा जा रहा है क्योंकि इसका उद्घाटन लालू प्रसाद यादव द्वारा किया गया था? वहीं दूसरी ओर, 90 वर्ष पुराने बिहार भवन को अब तक नहीं तोड़ा गया, जो सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है.शक्ति यादव ने आरोप लगाया कि यह निर्णय ईर्ष्या और जलन के कारण लिया गया है, न कि किसी तकनीकी या जनहित कारण से इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य को लेकर भी स्पष्ट जानकारी देने की मांग की.उनका कहना है कि मुख्यमंत्री राज्य के सर्वोच्च कार्यकारी पद पर है, ऐसे में जनता को उनके स्वास्थ्य की स्थिति से अवगत कराया जाना चाहिए.अंत में शक्ति यादव ने दोहराया कि बिहार के संसाधनों पर हर नागरिक का अधिकार है और सरकार को पारदर्शिता के साथ हर निर्णय की जानकारी जनता को देनी चाहिए.
