रांची (RANCHI): झारखंड लोक सेवा आयोग की संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा–2 (JPSC-2) में सामने आए बहुचर्चित घोटाले की जांच अब और तेज हो गई है. इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने औपचारिक रूप से प्रवेश करते हुए ईसीआईआर दर्ज कर ली है. ईडी को आशंका है कि परीक्षा में बड़े पैमाने पर अवैध लेन-देन हुआ है.
गौरतलब है कि JPSC-2 मामले की जांच पहले से ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है. CBI ने जांच के दौरान कई सफल अभ्यर्थियों को आरोपी बनाया है और इस पूरे मामले की निगरानी झारखंड हाईकोर्ट कर रहा है. हालांकि जांच की रफ्तार इतनी धीमी रही कि इस परीक्षा के जरिए चयनित कई अधिकारी अपनी सेवा पूरी कर सेवानिवृत्ति की कगार पर पहुंच चुके हैं.
ओवरराइटिंग और इंटरव्यू अंकों में हेरफेर के आरोप
JPSC-2 परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे. शुरुआती जांच निगरानी ब्यूरो ने की थी, जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं में ओवरराइटिंग के जरिए अंक बढ़ाने और इंटरव्यू में जरूरत से ज्यादा अंक देकर अभ्यर्थियों को सफल कराने की बात सामने आई थी.
इस घोटाले में JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप कुमार प्रसाद सहित आयोग के कई सदस्य और पदाधिकारी आरोपी बनाए गए थे, जिन्हें जेल भी जाना पड़ा था. दिलीप कुमार प्रसाद पहले आयोग के सदस्य थे और बाद में उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था.
JPSC-2 घोटाले के प्रमुख आरोपी
इस मामले में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष, सदस्य, परीक्षा नियंत्रक, मूल्यांकन से जुड़े अधिकारी, एक निजी कंपनी के मैनेजर और कई ऐसे अभ्यर्थी आरोपी बनाए गए हैं, जो बाद में DSP, राज्य प्रशासनिक सेवा, वित्त सेवा और अन्य पदों पर नियुक्त हुए.
परीक्षा मूल्यांकन और इंटरव्यू बोर्ड भी घेरे में
जांच में यह भी सामने आया कि JPSC-2 परीक्षा में मूल्यांकन करने वाले कई परीक्षक और इंटरव्यू बोर्ड से जुड़े विशेषज्ञों की भूमिका संदिग्ध रही. इनमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, रीडर, एसोसिएट प्रोफेसर, प्रिंसिपल और सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं.
अब ईडी की एंट्री के बाद इस घोटाले में मनी ट्रेल, संपत्ति और लेन-देन से जुड़े पहलुओं की गहन जांच की जाएगी. माना जा रहा है कि इससे JPSC-2 घोटाले से जुड़े कई नए खुलासे हो सकते हैं.
