धनबाद(DHANBAD): निरसा में पूर्व विधायक अपर्णा सेन गुप्ता और विधायक अरूप चटर्जी के बीच शुरू हुआ विवाद अब सांसद ढुल्लू महतो की ओर मुड़ गया है. सांसद और निरसा के माले विधायक अरूप चटर्जी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. बांग्लादेशी तक की बात उठ गई है. बंगाली समाज भी गुस्से में है. बंगाली समाज सांसद ढुल्लू महतो का पुतला फूंक रहा है. कह रहा है कि सांसद ढुल्लू महतो ने विधायक अरूप चटर्जी के साथ -साथ बंगाली समाज के खिलाफ भी आपत्तिजनक बाते कही है. सिर्फ अरूप चटर्जी के बारे में ही नहीं, उनके पिता स्वर्गीय गुरदास चटर्जी के बारे में भी गलत टिप्पणी की गई है. सांसद ढुल्लू महतो पिछले दिनों निरसा भी गए थे और धनबाद में संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि बंगाल की जो स्थिति है, वह अरूप चटर्जी निरसा में भी बनाना चाह रहे है. चुनाव जीतने के बाद निरसा में गोली और बम चलने लगे. इसकी जांच होनी चाहिए.
सांसद ढुल्लू महतो निरसा के गोपीनाथ पुर भी गए थे
सांसद ढुल्लू महतो ने कहा था कि विधायक अरूप चटर्जी के पिता के समय कितनी फैक्ट्रियां बंद हो गई. वही काम अरूप चटर्जी भी पुलिस को मोहरा बनाकर कर रहे है. दरअसल, सांसद ढुल्लू महतो विवाद स्थल गोपीनाथपुर भी पहुंचे थे. उन्होंने भाजपा के बैनर तले धरना दे रहे लोगों को संबोधित करते हुए निरसा विधायक को बांग्लादेशी बताया था. इसके बाद से ही विवाद बढ़ गया और अब बांग्ला समाज सांसद ढुल्लू महतो के खिलाफ हो गया है. बांग्ला भाषी उन्नयन समिति के बैनर तले पूरे जिले में इसका विरोध हो रहा है. सांसद का पुतला दहन किया जा रहा है. समाज के लोगों का कहना है कि बांग्ला यहां की मातृभाषा है और इसका अपमान कभी भी कोई बंगाली बर्दाश्त नहीं करेगा.
बांग्ला भाषा उन्नयन समिति फूंक रहा सांसद का पुतला
बांग्ला भाषा उन्नयन समिति का कहना है कि जब तक ढुल्लू महतो सार्वजनिक रूप से बंगाली समाज से आकर माफी नहीं मांगेंगे, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा. दरअसल, ईसीएल की गोपीनाथपुर कोलियरी में भाजपा समर्थित गोपीनाथपुर कोलियरी बेरोजगार संघर्ष मोर्चा की ओर से धरना दिया जा रहा है. सांसद रविवार की शाम गोपीनाथपुर पहुंचे थे और आंदोलनकारियों की हौसला अफजाई की थी. दूसरी ओर 9 सूत्री मांगों को लेकर माले की ओर से धरना दिया जा रहा है. इसके पहले धरना को लेकर विवाद भी हुआ था. आरोप लगाया गया था कि भाजपा के लोगों ने माले के अर्ध निर्मित पंडाल को फूंक दिया. बता दे कि निरसा में उपरी तौर पर शांति तो दिख रही है लेकिन भीतर ही भीतर निरसा में "राजनीतिक आग" सुलग रही है. चुनाव के बाद निरसा में माले और भाजपा के बीच टकराहट शुरू हो गई है .
टकराहट गोपीनाथपुर कोलियरी में आउटसोर्स कंपनी को लेकर शुरू हुई है
यह टकराहट गोपीनाथपुर कोलियरी में आउटसोर्स कंपनी को लेकर शुरू हुई है. दरअसल, 2024 में माले ने धनबाद जिले में भाजपा के किले को दरका दिया है. यह अलग बात है कि निरसा और सिंदरी दोनों विधानसभा सीट पर कम अंतर से ही सही, लेकिन भाजपा की हार हुई है. दोनों जगहों पर माले के विधायक बने है. यह बात भी सच है कि पहले भी निरसा में लाल झंडे में ही टकराहट होती थी. अपर्णा सेनगुप्ता के भाजपा में जाने के बाद भी टकराहट होती रही है. अपर्णा सेन गुप्ता पहले फॉरवर्ड ब्लॉक में थी. उसे समय भी एके राय की पार्टी (मासस) से उनकी टकराहट होती थी. अब मासस का माले में विलय हो गया है. 2024 का विधानसभा चुनाव हारने के बाद निश्चित रूप से विधायक अरूप चटर्जी का "अपर हैंड" हुआ है. रोजगार के इस मुद्दे पर भाजपा और माले आमने-सामने है. भाजपा समर्थित गोपीनाथपुर कोलियरी बेरोजगार संघर्ष मोर्चा की ओर से आउटसोर्स कंपनी जीसी पीएल का काम शुरू कराने के लिए आंदोलन किया जा रहा है तो माले समर्थित यूनियन रोजगार की मांग कर रही है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो