धनबाद(DHANBAD): यह कार जलने के पहले भी रहस्य थी और जलने के बाद भी रहस्य बनी हुई है. गनीमत रही की कार स्टेशन के मुख्य सड़क के बगल में खड़ी थी. इसलिए लोगों का ध्यान चला गया अन्यथा कुछ ही मीटर की दूरी पर पेट्रोल पंप भी है. अगर तत्काल आग पर काबू नहीं पाया जाता तो बड़ी दुर्घटना हो सकती थी. वैसे भी अग्नि देव का धनबाद पर कुदृष्टि पहले से बनी हुई है. पिछले साल आगलगी की घटनाओं ने कोहराम मचा दिया था. दरअसल, धनबाद स्टेशन रोड पर 15 दिनों से एक लावारिस कार खड़ी थी . मंगलवार की रात वह अचानक धू -धू कर जलने लगी. कार में आग कैसे लगी, इसका खुलासा अभी तक नहीं हुआ है.
कार किसकी है ,इसका भी पता नहीं चला है. किसी ने कार में आग लगाई अथवा दुर्घटना बस आग लग गई. इसका खुलासा भी नहीं हुआ है. आरोप है कि स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी थी. लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. कार के जल जाने के बाद कई तरह के सवाल उठ रहे है. क्या इस कार का उपयोग अपराध की घटनाओं में तो नहीं किया गया था? क्या अपराधी घटना को अंजाम देने के बाद कार को स्टेशन रोड पर लगाकर निकल गए? क्योंकि 15 - 20 दिन से यह कार पेट्रोल पंप के कुछ दूरी पर खड़ी थी. कार पर धूल की परत जम गई थी. इस कार पर दिल्ली का नंबर लगा हुआ है.
अब जब कार जल गई है, पुलिस इस मामले की जांच में जुटी हुई है. सवाल किया जा रहा है कि अगर कार मालिक ट्रेन पड़कर जाते तो कार को वाहन पड़ाव में जरूर लगाते. इस तरह लावारिस मुख्य सड़क के किनारे छोड़कर नहीं जाते. जिस समय कार में यह आग लगी , उस समय कार के पीछे लगी दूसरी कार को बचाना लोगों के लिए मुश्किल हो रहा था. किसी तरह पीछे खड़ी कार का शीशा तोड़कर पुलिस की मदद से लोगों ने बचाया. कुछ ही दूरी पर पेट्रोल पंप होने की वजह से अफरातफरी का माहौल बन गया था. देखना होगा कि इस पूरे प्रकरण से पर्दा कब उठना है और कार की असलियत के बारे में क्या खुलासा होता है?
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो