टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने लापता बच्चों की बरामदगी को लेकर पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि पिछले 12 दिनों से लापता बच्चों को ढूंढने में पुलिस ने कड़ी मेहनत की और दिन-रात एक कर दिया. इसी का नतीजा रहा कि यह मामला गांव-गांव तक पहुंचा और लोग बच्चों की तलाश में जुट गए, लेकिन अंत में बच्चों को सकुशल ढूंढ निकालने का काम बजरंग दल के युवाओं ने किया.
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि रामगढ़ के चितरपुर से बजरंग दल के कार्यकर्ता सचिन प्रजापति, डब्लू साहु, सन्नी और उनके साथियों ने जिस साहस और दिलेरी के साथ बच्चों को बरामद किया, वह काबिल-ए-तारीफ है. उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीरें सबके सामने हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पुलिसकर्मी पूरी वाहवाही लूटने के लिए सच्चाई को अपने तरीके से पेश कर रहे हैं. पुलिस की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस कई सवाल खड़े करती है. उन्होंने कहा कि पुलिस ने अपनी पीठ तो थपथपा ली, लेकिन जिन बजरंग दल के युवाओं ने बच्चों को ढूंढ निकाला, उनके लिए प्रोत्साहन के दो शब्द तक नहीं कहे गए. अब क्रेडिट लेने की होड़ मचेगी और चुनिंदा लोगों को ही पुरस्कार बांटे जाएंगे.
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि वे चाहते हैं कि पुलिस अपनी गलती सुधारे और इन युवाओं को बुलाकर सम्मानित करे, ताकि भविष्य में भी लोग ऐसे मामलों में आगे आकर मदद करें. उन्होंने कहा कि दूसरों की मेहनत और पहचान को हड़प लेना एक दलाल संस्कृति है, जिससे बचना चाहिए.
उन्होंने मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि प्रशासन की जिस तरह प्रशंसा की जा रही है, उससे लगता है कि उन्हें अधिकारियों ने पूरी और सही जानकारी नहीं दी है. मुख्यमंत्री को जमीनी हकीकत जानकर अपने सोशल मीडिया पोस्ट में संशोधन करना चाहिए और असली नायकों को सम्मान देना चाहिए.
बाबूलाल मरांडी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो यह मान लिया जाएगा कि यह व्यवस्था संवेदनहीन थी, है और आगे भी रहेगी. उन्होंने पुलिस के उच्च अधिकारियों की चुप्पी को निंदनीय और शर्मनाक बताया.
