मुजफ्फरपुर : तमिलनाडु के डीएमके सांसद दयानिधि मारन के विवादित बयान को लेकर मुजफ्फरपुर न्यायालय में परिवाद दायर किया गया है. अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने उनके खिलाफ कोर्ट में परिवाद दाखिल कराया है. न्यायालय ने परिवाद स्वीकार करते हुए सुनवाई की अगली तिथि 22 जनवरी को दी है.
दयानिधि मारन के विवादित बयान मामला
अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा का कहना है कि 15 जनवरी को न्यूज में सांसद दयानिधि मारन उत्तर भारत की महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहे थे. उनके अनुसार सांसद ने कहा था कि उत्तर भारत की लड़कियों को घर पर रहने, खाना बनाने और बच्चे पैदा करने के लिए कहा जाता है जबकि तमिलनाडु में लड़कियों को पढ़ने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है. साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने महिलाओं को काम पर न जाने और केवल घरेलू दायित्व निभाने तक सीमित रहने जैसी बातें कही हैं. जिसे लेकर दाखिल परिवाद में आरोप है कि इस प्रकार का बयान उत्तर भारत की महिलाओं का अपमान करने, उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने तथा क्षेत्रीय वैमनस्य पैदा करने की मंशा से दिया गया है.
गहरा मानसिक आघात पहुंचा है
उन्होंने कहा कि बयान सुनकर उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचा है और वे स्वयं को अपमानित महसूस कर रहे हैं. सुधीर ओझा का कहना है कि इससे पहले भी डीएमके नेताओं द्वारा सनातन धर्म को लेकर विवादित बयान दिए जा चुके हैं. आरोप लगाया गया है कि विधान सभा चुनाव को ध्यान में रखकर जानबूझकर ऐसे बयान दिए जा रहे हैं ताकि राजनीतिक लाभ लिया जा सके. जिसे लेकर दयानिधि मारन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 74, 75, 79, 192, 298, 352 और 251(2) के तहत कानूनी कार्रवाई की मांग की है. कोर्ट ने परिवाद स्वीकार करते हुए मामले को सुनवाई की अगली तिथि 22 जनवरी को दी है.
