सोशल मीडिया का "शेर" जयराम महतो क्या सियासी अखाड़े में दिखा पाएंगे दमखम ?

    सोशल मीडिया का "शेर" जयराम महतो क्या सियासी अखाड़े में दिखा पाएंगे दमखम  ?

    रांची (RANCHI) : छात्र नेता से राजनीति की पारी शुरुआत करने वाले जयराम महतो अभी मुश्किलों में फंसते हुए नजर आ रहे हैं. उनपर अभी गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है. उन्होंने गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र से नामांकन दाखिल किया है. गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र से उनका सामना आजसू प्रत्याशी चंद्रप्रकाश चौधरी और झामुमो प्रत्याशी मथुरा प्रसाद महतो से होगा. जयराम के नामांकन से पहले रांची पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए बोकारो पहुंची थी लेकिन उन्हें अरेस्ट नहीं कर सकी, जिसके कारण रांची पुलिस की किरकिरी भी हुई. अब यह मामला तुल पकड़ लिया है. 

    छात्र नेता से जयराम महतो की राजनीति पारी की शुरुआत

    धनबाद के तापचांची इलाके के निवासी जयराम महतो पूरे राज्य में युवा टाइगर के नाम से जाने जाते हैं. झारखंड की राजनीति में अब जयराम महतो जाना पहचाना नाम हो गया है. उन्होंने अपनी सियासी पारी की शुरुआत छात्र नेता के रूप में की थी. छात्रों से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को आंदोलन के जरिये उठाया. उन्होंने पिछले चार सालों से भाषा, डोमिसाइल, रोजगार के सवालों पर विभिन्न जगहों पर आंदोलन की. वे जहां भी राज्य के जिस में क्षेत्र में भाषण देते थे, वहां हजारों की संख्या में छात्र और युवाओं की भीड़ जुट जाती थी. आंदोलन से उभरे सबसे बड़े नेता जयराम महतो ने एक नई राजनीतिक पार्टी झारखंडी भाषा-खतियान संघर्ष समिति का गठन किया. 

    सोशल मीडिया पर बेहद लोकप्रिय हैं जयराम

    छात्र नेता के रूप में उभरे जयराम महतो ने खतियान, स्थानीयता, रोजगार सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर छात्र और युवाओं को लेकर आंदोलन करते रहे. दो बार विधानसभा का घेराव भी किया और तीन बार झारखंड बंद भी बुलाया. राज्य में करीब साठ से ज्यादा जनसभाएं कर चुके हैं. वे जहां भी सभाएं करते थे वहां हजारों की तदाद में लोग जुटते थे. जयराम महतो सोशल मीडिया पर भी बेहद लोकप्रिय है. उनके भाषणों के सैकड़ों वीडियो यू-ट्यूब और फेसबुक पर काफी व्यूज हैं. 

    छह सीटों पर किस्मत अजमाने उतरे हैं जेबीकेएसएस के प्रत्याशी

    जेबीकेएसएस सुप्रीमो जयराम महतो क्षेत्रीय राजनीति का एक और नया कोण बन गया है. झारखंड की राजनीति में जो जातीय समीकरण है उसमें वो काफी फिट बैठते हैं. चुकि वो खुद कुर्मी जाति से आते हैं. राज्य की राजनीति में कुर्मी को आदिवासियों के बाद सबसे ज्यादा प्रभावी माना जाता है. उनका मानना है कि राज्य में युवाओं की राजनीति में भागीदारी बहुत जरूरी है. युवाओं को सक्रिय रूप से आना होगा, तभी जाकर राज्य की स्थिति बदल सकती है. जयराम की पार्टी जेबीकेएसएस राज्य में छह लोकसभा सीटों पर प्रत्याशियों को उतारा है, जिसमें खूंटी, रांची, धनबाद, दुमका, गिरिडीह, कोडरमा शामिल है. इस चुनाव में यह नई पार्टी क्या कुछ कर पाएगी, ये तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चलेगा. लेकिन इतना जरूर है कि इस नए सियासी उभार ने राज्य की स्थापित पार्टियों की टेंशन को जरूर बढ़ा दिया है.


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