विधवा बहू को अपने सास-ससुर को भरण पोषण के लिए नहीं देना पड़ेगा गुजारा भत्ता, बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिया आदेश

    विधवा बहू को अपने सास-ससुर को भरण पोषण के लिए नहीं देना पड़ेगा गुजारा भत्ता, बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिया आदेश

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): पति की मृत्यु के बाद किसी भी दवा को अपने सास-ससुर यानी पति के माता-पिता को किसी प्रकार का गुजारा भत्ता देना नहीं पड़ेगा. कोर्ट ने ऐसा फैसला दिया है. ताजा जानकारी के अनुसार मुंबई हाई कोर्ट ने शोभा तिड़के की ओर से दायर याचिका पर अपना आदेश दिया है. मुंबई हाई कोर्ट के जस्टिस किशोर संत की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया है. 38 वर्षीय विधवा शोभा तिड़के ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी.

    मुंबई हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 की व्याख्या से यह स्पष्ट होता है कि इस धारा में ससुर और सास का उल्लेख नहीं है. ऐसे में याचिकाकर्ता से भरण-पोषण का दावा करने के लिए प्रतिवादियों द्वारा कोई आधार नहीं बनता है.

    याचिकाकर्ता महिला शोभा तड़के के पति महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम में काम करते थे. उनकी मृत्यु हो गई थी. इसके बाद उन्होंने मुंबई के सरकारी जेजे अस्पताल में काम करना शुरू किया. बेटे की मौत के बाद महिला के ससुर किशनराव तिड़के (68) और कांताबाई (60) ने दावा किया था कि उनके बेटे की मृत्यु के बाद उनके पास आय का कोई साधन नहीं है.ऐसे में उनकी बहू द्वारा जीवन यापन के लिए गुजारा भत्ता दिया जाए.

    मुंबई हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला

    जब यह मामला कोर्ट में पहुंचा तो महिला ने दावा किया कि उसके पति के माता पिता के पास गांव में जमीन और एक घर है. इसके अलावा राज्य परिवहन निगम से भी 1.88 लाख रुपए मिले हैं. सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद मुंबई हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कहा कि यह साफ है कि मृतक पति राज्य परिवहन निगम में काम करता था. जबकि याचिकाकर्ता अब राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग में काम करती है. इससे स्पष्ट होता है की महिला को अनुकंपा के आधार पर नौकरी नहीं मिली है. इसलिए गुजारा भत्ता सास ससुर को देने की जरूरत नहीं है.

     


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