झारखंड में कहर बनकर टूटी बारिश ने धनबाद को 30 साल पहले की उस भयानक घटना की क्यों दिला रही याद, क्या हुआ था 1995 में, पढ़िए डिटेल्स में

    झारखंड में कहर बनकर टूटी बारिश ने धनबाद को 30 साल पहले की उस भयानक घटना की क्यों दिला रही याद, क्या हुआ था 1995 में, पढ़िए डिटेल्स में

    धनबाद( DHANBAD) : झारखंड में बारिश कहर बनकर टूटी है. कोई ऐसा तबका नहीं है, जो प्रभावित नहीं हुआ है. किसान माथा पीट रहे हैं. कोलियरियों का उत्पादन घट गया है. रिहायशी इलाकों में पानी प्रवेश कर गया है. लोग त्राहि त्राहि कर रहे हैं. किसान अपनी जमा पूंजी लगाकर खेतों में धान के बिचड़े डाले हैं ,लेकिन अब  सड़ने का खतरा उत्पन्न हो गया है.

    किसानों के लिए तो यह साल बहुत बुरा रहा. मार्च, अप्रैल महीने में बारिश और ओलावृष्टि से सब्जी की फसल नष्ट हुई. उन्हें उम्मीद थी कि धान के फसल हो जाने से उन्हें राहत मिलेगी. लेकिन जून, जुलाई में हो रही लगातार और तेज वर्षा उनके लिए परेशानी पैदा कर दी है. उनके पास अब पूंजी भी नहीं है, कि वह खेत में नए बिचड़े डाल सके. ऐसे में झारखंड के किसानों के लिए सरकार ही एकमात्र सहारा दिख रही है.

    झारखंड सरकार को किसानों की सुध लेनी चाहिए. इसकी मांग भी उठ रही है. झारखंड में समस्त कृषि व्यवस्था लगभग मानसून पर निर्भर है. यदि समय के मुताबिक बारिश हुई तो खेती संभव है. 22 से 25 दिनों से हो रही लगातार बारिश ने खेती के गुणा गणित को बिगाड़ दिया है. यह तो हुई किसानों की बात, कोल इंडिया की अनुषंगी इकाई भारत कोकिंग कोल लिमिटेड का उत्पादन घट गया है. बारिश की वजह से उत्पादन का नुकसान हुआ है. इसे मेकअप करना कंपनी के लिए बड़ी चुनौती होगी. लोगों को धूप के दर्शन नहीं हो रहे हैं. अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है. घर-घर लोग बीमार पड़े हुए हैं .सड़कों पर पानी भर गया है.

    धनबाद शहर में नगर निगम की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है. कई रिहाईशी  इलाकों में जल जमाव हो गया है. कई कॉलोनी में बारिश का पानी घुस गया है. बाढ़ का नजारा पैदा हो गया है. कॉलोनी की सड़क पर पानी जमने से लोगों को जूते चप्पल उतार कर जाना पड़ रहा है. धनबाद का एक इलाका नावाडीह है. यहां तो बरसात के दिनों में लोगों का जीना दुश्वार हो जाता है. जल जमाव से यह कॉलोनी टापू बन गई है. कई घरों में घुटने तक पानी जमा हो गया है. इतना ही नहीं, दिहाड़ी मजदूरो का रोजगार भी बारिश ने छीन लिया है. रोज कमाने खाने वालों को परेशानी पैदा हो गई है.

    बिजली की निर्बाध आपूर्ति भी संभव नहीं हो पा रही है. जगह-जगह ट्रांसफार्मर जल जा रहे हैं .बिजली के तार टूट जा रहे हैं. ऐसे में लोगों को अंधेरे में रहना पड़ रहा है. झारखंड में प्रकृति का यह रवैया प्रदेश को परेशानी में डाल दिया है.कोयलांचल में लगातार हो रही बारिश से लोग डरे सहमे हुए भी हैं. आज से लगभग 30 साल पहले सितंबर के महीने में इसी तरह की बारिश ने कोयलांचल को" हिला" कर रख दिया था.

    बीसीसीएल की खदानों में पानी भर गया था. ग़जलीटांड़ हादसा  26 सितंबर 1995 को हुआ था. जिसमें 70 से अधिक लोगों ने जल समाधि ले ली थी. उस समय भी इसी तरह लगातार बारिश हो रही थी. अंतर सिर्फ यही था कि 1995 का वह महीना सितंबर का था और 2025 का यह महीना जुलाई का है.उस समय धनबाद बिहार में था और आज झारखंड में है.

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो


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