शादी के समय मायके या ससुराल वाले की तरफ से मिले सोने चांदी के गहनों पर किसका होता है हक, पढ़ें क्या कहता है कानून


टीएनपी डेस्क(TNP DESK):जब लड़की की शादी होती है तो उसको मायके और ससुराल वालों की तरफ से सोने चांदी के आभूषण उपहार के तौर पर दिए जाते है.वही रिश्तेदारों की ओर से भी कई ऐसे महंगे उपहार मिलते है जो काफी किमती होते है.कई बार ऐसा देखा जाता है कि लड़की जब ब्याह कर ससुराल आती है तो उसके गहनों पर ससुराल के लोग या पति दावा करने लगते है. अब लड़की को ये समझ में नहीं आता है कि ससुराल और मायके वालों की तरफ से मिले इस गहने पर किसका स्वामित्व होगा.अगर आपको भी इसके बारे में जानकारी नहीं है तो आज हम आपको विस्तार से बताने वाले है कि आखिर इस आभूषण पर किसका हक है.
स्त्रीधन क्या होता है ?
आपको बता दें कि शादी के समय लड़की वालों की तरफ से या लड़के वालों की तरफ से दुल्हन को जो भी सोने चांदी के आभूषण दिए जाते है, वहां स्त्रीधन कहा जाता है.जिसका मतलब यह होता है कि आभूषण पर केवल और केवल महिला का हक है.इस पर ससुराल के लोग दावा नहीं कर सकते है.महिला चाहे तो उसको बेचे या किसी को दे लेकिन इसमे हस्तक्षेप करने का अधिकार पति को भी नहीं है.
पढे स्त्रीधन पर हाई कोर्ट का फैसला
इस मामले को लेकर हाई कोर्ट ने भी बड़ा फैसला सुनाया था जिसमें कहा था कि तलाक के बाद भी गहनों पर केवल और केवल महिला का ही अधिकार है.ससुराल पक्ष के लोग आभूषण पर दावा नहीं कर सकते है.चलिए अब इससे संबंधित कानून भी आज हम आपको बता देते है.दरअसल हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 14 और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 27 के तहत महिला के स्त्रीधन के अधिकार सुरक्षित है.
महिला के गहनों पर नहीं होता है किसी का भी हक
आपको बता दें कि महिला अपने ससुराल वालों सास या ससुर पति को आभूषण रखने के लिए देती है तो वह इसके संरक्षण कहलाते है इसके मालिक नहीं होते है.ना तो वह उसको बेच सकते है और ना नियंत्रित कर सकते है. महिला जब भी मांगे उन्हें लौटना पड़ेगा.यदि ससुराल वाले गहनें नहीं लौटाते है तो महिला दावा कर सकती है और कानून कार्रवाई कर सकती है.सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि स्त्रीधन पर महिला का पूरा हक है और पिता को भी अपनी बेटी के स्त्रीधन के लिए आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि वह बेटी की अपनी संपत्ति है.
ससुराल वाले गाने ना करे वापस तो क्या करेगी महिला ?
यदि महिला का पति या ससुराल वाले उसके गहनों को कब्जा में ले लिया है और वापस नहीं कर रहे है तो महिला को सबसे पहले थाने में शिकायत दर्ज करानी चाहिए.शिकायत दर्ज होने के बाद वह कोर्ट की शरण भी ले सकती है जहां वह कानूनी लड़ाई लड़कर अपने हक को पा सकती है.दअरसल गहनो या महँगी चीज़ों को लेकर महिला के पास कोई सबूत नहीं होता है जिसके लिए उसे काफ़ी ज़्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है ऐसे में 'संभावनाओं की प्रबलता' (balance of probabilities) के सिद्धांत पर कोर्ट फैसला कर सकता है.
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