आखिर कब मणिपुर में थमेगी हिंसा ?, दो गुटों के बीच गोलीबारी में दो लोगों की मौत

    आखिर कब मणिपुर में थमेगी हिंसा ?, दो गुटों के बीच गोलीबारी में दो लोगों की मौत

    Tnp desk:-मणिपुर में हिंसा की भड़की आग की लपटे लगातार बढ़ते ही जा रही है. यह थमने का नाम ही नहीं ले रही है. रुक-रुककर हिंसा का कोई न कोई मामला सामने आते ही रहता है. एकबार फिर हिंसा का ताजा मामला कांगपोकली जिले से है, जहां पर सोमवार को दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच गोलीबारी हुई जिसमे , दो लोगों की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि गोलीबारी की यह घटना हारोथेल और कोब्शा गांवों के बीच हुई. हालांकि, हिंसा किस वजह से शुरु हुई, अभी तक इसका पता पूरी तरह से नहीं लगा है.

    आपातकालीन बंद का एलान

    एक आदिवासी संगठन ने दावा किया कि कुकी-जो समुदाय के लोगों पर बिना किसी उकसावे के हमला किया गया. इसके बाद ही जिले में बंद घोषित कर दिया गया है. मई की शुरुआत में पूर्वोत्तर राज्य में मैतई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से ही यह सुलह रहा है. इस क्षेत्र में ग्रामीणों के बीच गोलीबारी की कई घटनाएं देखी गई हैं. हाल ही में भीड़ के द्वारा एक महिला को निर्वस्त्र करके घुमाने के बाद पूरे देश में मणिपुर हिंसा को लेकर बवाल हुआ था. खुद प्रधानमंत्र नरेन्द्र मोदी को मीडिया के सामने आकर बयान देना पड़ा. इसे लेकर ससंद में विपक्षी पार्टियों ने सरकार को घेरा था. अभी फिर हिंसा की आग से इलाका झुलस गया.इधर, कुकी-जो समुदाय के लोगों पर अकारण हमले की निंदा करते हुए कांगपोकपी स्थित कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (COTU) ने जिले में 'आपातकालीन बंद' का एलान किया है।

    मई में भड़की दी हिंसा

    एसटी का दर्जा देने की मैतई समुदाय की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में तीन मई को आयोजित 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के बाद हिंसा भड़की थी. इसके बाद तो मैतई और कुकी समुदाय के बीच पूरे राज्य में लड़ाई झगड़े देखने को मिला. इस लड़ी में 180 से अधिक लोग मारे गए थे.


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