Electricity Crisis : राज्य में कब खत्म होगी बिजली कटौती, जानिए इस संकट के पीछे की पूरी कहानी

    Electricity Crisis : राज्य में कब खत्म होगी बिजली कटौती, जानिए इस संकट के पीछे की पूरी कहानी

    रांची(RANCHI): राज्य में पिछले दो महीने से लगातार बिजली संकट जारी है. इस संकट की वजह से पूरे प्रदेश के नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. दरअसल, किसी के घर में पानी नहीं है तो किसी के बच्चे का ड्रेस प्रेस नहीं हुआ है. वहीं, ज्यादातर किसान अपनी खेतों में सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं. इन सभी चीजों के अलावा भी लोगों को कई और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. हम आपको बतायेंगे राज्य में बिजली कटौती के कारण क्या परेशानियां हो रही हैं और इसके पीछे की पूरी कहानी क्या है?

    राज्य के हजारों उद्योग घाटे में

    बिजली कटौती की वजह से सिर्फ आम लोगों के अलावा इद्योग जगत को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. बता दें कि राज्य में कई ऐसे शहर हैं जहां बड़ी संख्या में उद्योग लगे हुए हैं. राज्य की  राजधानी रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो जैसे क्षेत्र में काफी संख्या में उद्योग लगे हुए हैं. लेकिन बिजली संकट की वजह से उद्योग कब तक चल पायेगा कहना मुश्किल है. बिजली कटौती की वजह से कंपनी घाटे में जा रही है.     

    जेनरेटर का इस्तेमाल काफी मंहगा

    दरअसल, उद्योग में काफी बिजली की जरूरत होती है. ऐसे में अगर लंबे समय तक बिजली की कटौती होती है तो जेनरेटर का इस्तेमाल करना दोगुना महंगा हो जाता है. आपको बता दें कि फिलहाल छह घंटे तक की बिजली कटौती उद्योगिक क्षेत्रों में हो रही है. ऐसे में अगर कंपनी जेनरेटर का इस्तेमाल करती है तो उनकी लागत दो से तीन गुना बढ़ जाती है. और वर्तमान स्थिति में उद्योग के साथ यही हो रहा है. ऐसे में खरीदार झारखंड की बजाय दूसरे राज्यों से सामान खरीद रहे हैं.

    राजधानी के 2000 से ज्यादा उद्योग बंद होने की कगार पर

    बता दें कि राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली कटौती तो जारी है ही लेकिन राज्य की राजधानी भी इससे अछूता नहीं है. दरअसल, पूरे राज्य  की बात करें तो लगभग 18 हजार उद्योग बंद होने की कगार पर हैं. लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि इन 18 हजार में से 2 हजार कारखाने राजधानी रांची से हैं. अगर कुछ दिन और इसी तरह कटौती जारी रहा तो ज्यादातर छोटे, मध्यम और लघु उद्योग बंद हो जायेंगे.

    1300 की जरूरत मिल रही 800 मेगावाट

    बता दें कि राज्य के उद्योगिक क्षेत्रों की बात करें तो वहां लगभग 1300 मेगावाट बिजली की जरूरत पड़ती है. लेकिन जेबीवीएनएल मात्र 800 मेगावाट ही बिजली खरीद पा रही है. ऐसे में लगभग चार से छह घंटे तक बिजली की कटौती हो रही है.

    50 हजार से ज्यादा कामगार हो सकते हैं बेरोजगार

    बता दें कि बिजली कटौती की स्थिति अगर कुछ और दिन ऐसी रहती है तो हजारों की संख्या में उद्योग बंद हो जायेंगे. उद्योग बंद होने का सीधा असर रोजगार पर पड़ेगा. दरअसल, एक कंपनी में लगभग 10 से 12 लोग काम करते हैं. ऐसे में 60 से 70 हजार कामगारों के रोजगार पर संकट आ सकता है. और अगर इतनी बड़ी संख्या में एक साथ लोग बेरोजगार होंगे तो लोगों के आजीविका पर बड़ा असर पड़ेगा.

    बिजली कटौती के पीछे का पूरा कारण

    बिजली कटौती का मुख्य कारण राज्य की लगातार बढ़ती उधारी है. दरअसल, राज्य सरकार की बिजली कंपनियों पर उधारी काफी बढ़ गई है, इसलिए अतिरिक्त खरीदारी बंद कर दी गई है. बता दें कि आधुनिक पावर से 180 मेगावाट की खरीदारी पहले राज्य सरकार करती थी लेकिन लंबे से इस खरीदारी पर रोक लगी हुई है. दरअसल, क्रेडिट सुविधा रहने पर पूर्व में जेबीवीएनएल देशभर के विभिन्न पावर कंपनियों से इंडियन एनर्जी एक्सचेंज के माध्यम से प्रतिदिन तय ₹12 प्रति यूनिट की दर पर करीब 5 से 8 करोड रुपए की अतिरिक्त बिजली खरीद कर उपभोक्ताओं को देता था लेकिन उधारी बढ़ जाने के चलते इस खरीद पर केंद्र सरकार ने नए नियमों के तहत रोक लगा दी है.

    राज्य और केंद्र सरकार के झगड़े में पीस रही आम जनता

    राज्य की हेमंत सरकार पर बिजली कटौती पर केंद्र सरकार को जिम्मेवार बता रही है. राज्य सरकार की मानें तो केंद्र उन्हें रॉयल्टी/जीएसटी का पैसा नहीं दे रही है. ऐसे में वो बकाया कहां से दे. वहीं, केंद्र सरकार अपनी अलग बात बता रही है. खैर, राज्य और केंद्र की इस लड़ाई में मुसिबत आम आदमी को झेलना पड़ रहा है.

    संकट कब तक होगी दूर, जानिए

    बिजली संकट राज्य में कब तक रहेगी ये फिलहाल कहना थोड़ा मुश्किल है. क्योंकि राज्य और केंद्र दोनों एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. ऐसे में राज्य सरकार क्या करेगी इसकी जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है, लेकिन सूत्रों की मानें तो फिलहाल ये कटौती जारी रहेगी.    


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