होमवर्क रह गया अधूरा तो टीचर ने दी ऐसी खौफनाक सजा कि सहमी मासूम…अब स्कूल के नाम से भी कांप जाती है बच्ची

    होमवर्क रह गया अधूरा तो टीचर ने दी ऐसी खौफनाक सजा कि सहमी मासूम…अब स्कूल के नाम से भी कांप जाती है बच्ची

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : स्कूल, शिक्षा का वो मंदिर है, जहां हम शिक्षा के साथ ही जीवन जीने का सलीका भी सीखते हैं. स्कूल में ही हमे एक दूसरे की इज्जत करना, एक दूसरे के साथ प्यार से रहना और एक दूसरे का भला सोचना भी सिखाया जाता है, पर यही स्कूल कभी कभी किसी बच्चे के लिए नाइट मेयर भी बन सकता है. ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां स्कूली बच्ची होमवर्क नहीं कर पायी, तो शिक्षिका ने ऐसी सजा दी, कि अब छात्रा स्कूल के नाम पर भी कांप जाती है. यहाँ तक की बच्ची को मनोचिकित्सक से दिखाने की जरूरत पड़ी. जहां डॉक्टर का कहना है की बच्ची को किसी दूसरे स्कूल में दाखिला दिलाना चाहिए. बताते चलें कि मामला हरियाणा के गोहाना का है, जहां प्राइवेट स्कूल की प्राचार्य पर अमानवीय व्यवहार का आरोप लगा है. 

    आरोप है की पाँचवीं क्लास की बच्ची के होमवर्क ना करने पर स्कूल के टीचर ने कक्षा में छात्रा से पोछा लगवाया गया और अन्य छात्रों के सामने शर्मिंदा किया. परिजनों ने इसे गंभीर मामला बताते हुए पुलिस, प्रशासन और शिक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराई है. परिजनों का कहना है कि बीते दिनों बच्ची बुखार के कारण अपना होमवर्क पूरा नहीं कर पाई थी. आरोप है कि इस पर स्कूल प्राचार्य ने बच्ची को कक्षा में बुलाकर उसके हाथ में पोछा थमा दिया और पूरी कक्षा के सामने सफाई करवाने का निर्देश दिया. इतना ही नहीं, बच्ची को अन्य बच्चों के सामने खड़ा कर “शेम-शेम” बुलवाया गया, जिससे वह मानसिक रूप से आहत हो गई. बच्ची की मां ने बताया कि इस घटना के बाद से उसकी बेटी स्कूल जाने से डर रही है और मानसिक सदमे में है. परिजनों ने बच्ची को चिकित्सक को दिखाया, जहां डॉक्टर ने सलाह दी कि बच्ची को फिलहाल स्कूल बदल दिया जाए ताकि उसका आत्मविश्वास दोबारा लौट सके. 

    इधर पुलिस ने मामले की जांच शुरू करदी है और उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. वहीं इस तरह के मामले, बच्चों की मानसिक स्थिति पर काफी गहरा असर छोड़ सकता है और कई बार इस तरह की घटनाओं से बच्चे अपना आत्मविश्वास तक खो देते हैं. ऐसे में जरूरी है की बच्चों को चिंता मुक्त परिवेश दिया जाए.


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