बच्चियों के पीरियड्स आने की सही उम्र क्या ? जानिए इसकी देर या जल्दी आने से हेल्थ पर होने वाले नुकसान


टीएनपी डेस्क(TNP DESK):बच्चियों की पीरियड्स आने की सही उम्र 9 से 15 साल के बीच की होती है. यह उम्र सही समय है. इस समय अगर बच्चियों के पीरियड्स होते है तो उनके स्वास्थ्य पर कोई भी बुरा असर नहीं पड़ता है लेकिन आजकल गलत खान-पान और रहन-सहन की वजह से बच्चियों को 8 से 9 साल की उम्र में ही पीरियड्स आ रहे है. जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है. वही कई लड़कियां ऐसी भी होती है जिनको 15 16 साल की उम्र तक पीरियड्स नहीं आते है.ये भी उनके स्वास्थ्य के लिए काफी ज्यादा खराब है क्योंकि पीरियड्स नहीं आना भी स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है. ऐसे में चलिए जान लेते है. पीरियड की सही उम्र क्या होनी चाहिए और इसके जल्दी या देर से आने से स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है.
8 से 9 साल की आयु में पीरियड आने से होती है परेशानियाँ
सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि पीरियड्स अगर जल्दी आते है तो बच्चियों के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है तो आपको बता दें कि अगर उम्र में अगर बच्चे पीरियड्स होती है तो उनके स्तन या गर्भाशय में कैंसर का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है.दरअसल कम उम्र में पीरियड्स होने से जीवन भर एस्ट्रोजन हार्मोन के संपर्क में रहने का समय बढ़ता है, जो बच्चियों के ब्रेस्ट और गर्भासय में 15 से 20% तक कैंसर का खतरा बढ़ा देता है.
डिप्रेशन का खतरा
8 से 9 साल की उम्र में बच्चियों के खेलने कुदने की उम्र होती है ऐसे में जल्दी पीरियड्स आने की वजह से वह इस चीज के लिए तैयार नहीं होती है और सामाजिक चिंता के साथ उनके मानसिक विकास पर भी असर पड़ता है जिसकी वजह से उनके डिप्रेशन में जाने का खतरा बढ़ता है.
लंबाई रुक जाती है
जल्दी पीरियड आने की वजह से बच्चियों की हड्डी का विकास रुक जाता है जिसकी वजह से उनकी लम्बाई भी कम रह जाती है.वही मानसिक तौर पर उन्हें काफी ज्यादा टॉर्चर झेलना पड़ता है क्योंकि वह समझ नहीं पाती हैं कि उन्हें कैसे इसे संभालना है साथ ही दिल से जुड़ी बिमारियों का खतरा भी काफी ज्यादा बढ़ता है.
थायराइड पीसीओएस का खतरा
वहीं आपको बता दें कि कई लड़कियाँ ऐसी होती है जिन्हे 15 से 16 साल की उम्र के बाद भी पीरियड नहीं आते है. ऐसे में हार्मोनल असंतुलन यानी देर से आने का मतलब थायराइड पीसीओएस का खतरा बढ़ता है.
फर्टिलिटी में दिक्कत
देर से पीरियड आने से उनको भविष्य में गर्भधारणा से जुड़ी समस्याएं आती है क्योंकि भविष्य में फर्टिलिटी में दिक्कत आती है.
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