सदन में उठा निजी स्कूलों में मनमानी का मुद्दा, रि-एडमिशन, यूनिफॉर्म के नाम पर पैसे की वसूली के लिए कानून की मांग

    सदन में उठा निजी स्कूलों में मनमानी का मुद्दा, रि-एडमिशन, यूनिफॉर्म के नाम पर पैसे की वसूली के लिए कानून की मांग

    रांची (RANCHI) :  झारखंड विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के 18वें दिन निजी स्कूलों की मनमानी का मुद्दा उठा. भाजपा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने निजी स्कूलों की मनमानी का मुद्दा उठाया. सरकार से सवाल पूछा कि स्कूलों की मनमानी कैसे रोकेगी सरकार? क्या सरकार निजी स्कूलों की निगरानी के लिए कमेटी बनाएगी? जब उनका मन करता है, स्कूल फीस बढ़ा देते हैं, यूनिफॉर्म बदल देते हैं और फिर अभिभावकों से मोटी रकम वसूल लेते हैं.

    उन्होंने कहा कि यह अभिभावकों का शोषण करने वाली संस्था बन गई है. हर कोई चाहता है कि उसके बच्चे अच्छी शिक्षा लें और फिर कुछ बेहतर काम करके अपने माता-पिता का नाम रोशन करें. निजी स्कूल और शिक्षण संस्थान इसी भावना का फायदा उठा रहे हैं. कभी प्री-एडमिशन के नाम पर तो कभी ड्रेस कोड के नाम पर पैसे वसूलते हैं. मनमाना रवैया अपनाते हैं. निजी स्कूलों और अन्य शिक्षण संस्थानों में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है. सदन के अंदर जब मंत्री से पूछा गया कि निजी स्कूलों और शिक्षण संस्थानों पर सरकार का क्या नियंत्रण है, तो मंत्री ने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि जिले में डीसी होते हैं, वे निगरानी करते हैं.

    सत्येंद्र तिवारी ने उदाहरण देते हुए कहा कि कानून है कि अगर कोई हत्या करेगा तो उसे फांसी की सजा होगी, लेकिन हो यह रहा है कि लोग कानून के साथ आंख मिचौली कर रहे हैं, कानून की आंखों में धूल झोंक रहे हैं, इसके पीछे प्रशासनिक महकमा और सफेदपोश लोग सिंडिकेट बनाकर काम कर रहे हैं. प्राइवेट स्कूलों में लूट मची हुई है और सरकार कान में तेल डालकर सो रही है. इसके पीछे वजह साफ है कि इसका पैसा नेताओं तक पहुंचता है. उन्होंने कहा कि प्राइवेट स्कूल बस सेवा देते हैं, जिसमें कहा जाता है कि सभी बच्चों को सीट दिया जाएगा, लेकिन बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह बैठाकर ले जाया जाता है.

    रिपोर्ट-समीर


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