जिन हाथों में कलम और भविष्य होना चाहिए था, वो हाथ आज इंस्टाग्राम पर लहरा रहे हैं हथियार


कटिहार : “मारम सिक्सर के छह गोली छाती में रे..." यह महज एक गीत की पंक्ति नहीं, बल्कि कटिहार के माथे पर लिखा जा रहा 'मौत का फरमान' है. जिस कटिहार की पहचान कभी अमन और भाईचारे से थी. आज वहां की फिज़ा में बारूद की गंध घुल चुकी है.
यहां कानून का इकबाल नहीं, बल्कि 'कट्टे' का खौफ बोल रहा है! अपराध की यह आग कोढा के 'बगदादी' से सुलगनी शुरू हुई नगर थाना के गौरी टोला में 'तमंचे पर डिस्को' के साथ भड़की और अब आजमनगर तक जंगल की आग की तरह फैल गई है.
जिन हाथों में कलम और भविष्य होना चाहिए था
आजमनगर के जोकर पंचायत की तस्वीर तो और भी डरावनी है. जिन हाथों में कलम और भविष्य होना चाहिए था, वो हाथ आज इंस्टाग्राम पर 'रंगबाजी' दिखाने के लिए हथियार लहरा रहे हैं. फिरौती और दहशतगर्दी अब यहाँ के युवाओं के लिए अपराध नहीं, बल्कि 'स्वैग' और 'नशा' बन गया है.
प्रशासन के लिए चुनौती नहीं बल्कि अस्तित्व का सवाल
लेकिन रील की दुनिया में 'गैंगस्टर' बनने का शौक पालने वाले ये नौजवान एक कड़वा सच भूल गए हैं-इंस्टाग्राम की यह 'हीरो गिरी', असल ज़िंदगी में या तो थाने के लॉकअप में खत्म होती है या फिर शमशान की राख में. प्रशासन के लिए अब यह सिर्फ चुनौती नहीं बल्कि अस्तित्व का सवाल है. अगर वक्त रहते इस 'वायरल बुखार' का इलाज नहीं किया गया तो पूरा शहर इसकी जद में होगा.
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