बेटी की डोली से पहले पिता की उठी अर्थी, फिर मोहल्लेवाले ने मंदिर में कराई बिटिया की शादी, अंजान शख्स ने किया कन्यादान 

    बेटी की डोली से पहले पिता की उठी अर्थी, फिर मोहल्लेवाले ने मंदिर में कराई बिटिया की शादी, अंजान शख्स ने किया कन्यादान 

    TNP DESK- कहते हैं कि शादियां तो स्वर्ग में ही तय हो जाती हैं और   बेटी  तो समाज की होती है" यह कहावत हम सभी बचपन से सुनते आ रहे हैं. बिहार के मुज़फ्फरपुर में एक ऐसा ही वाकया सामने आया है जहां बेटी की शादी होनेवाली थी ,और मेहदी के दिन ही हार्ट अटैक से पिता की मौत हो गई. मोहल्लेवालों ने बिटिया को समाज की बिटिया समझा और स्थानीय मंदिर में बिटिया की शादी करा दी . सबसे सुखद पहलू यह है कि जिस जोड़ी ने नव दंपति का कन्यादान किया , वे मंदिर में सपत्नीक पूजा करने पहुंचे थे और उन्हें कोई अपनी बेटी नही थी. अनजान शख्स ने कन्यादान कर पुण्य अर्जित किया और कैमरे पर आने से भी बचते रहे. 

    शहनाई बजने से पहले ही घर में मातम छा गया

    पूरा मामला मिठनपुरा थाना इलाके में एक बार फिर से फिल्मी कहानी चरितार्थ हुई.  समाज के लोगों ने कंधे से कंधा मिलाकर एक वैसी बेटी का हाथ पीला कराया जिसके घर में शहनाई बजने से पहले ही मातम छा गया था.

    पूरी वाक्या शहर के रामबाग चौड़ी मोहल्ले का है  जहां बोचहां प्रखंड अंतर्गत सरफुद्दीनपुर निवासी दिनेश शर्मा के पुत्र कन्हाई कुमार की शादी बेला धीरनपट्टी  निवासी भिखारी शर्मा की पुत्री करीना के साथ 20 अप्रैल को होना निश्चित हुआ था लेकिन इसी बीच 19 अप्रैल को लड़की के पिता कि अचानक हार्ट अटैक से मौत हो गई. जिस घर में हल्दी लगे हाथों में खुशियां बरसनी थीं ,घर मे शहनाई बजाने की तैयारी चल रही थी वहां अचानक से मातमी सन्नाटा पसर गया. जब समाज के लोगों को इस बात का पता चला तो लोगों ने बढ़ चढ़कर समाज की बेटी का हाथ पीला करने का निर्णय लिया और स्थानीय महादेव मंदिर में विवाह के लिए तमाम तैयारियां शुरू की गई वर पक्ष के लोगों को भी इस निर्णय से अवगत कराया गया और उनके द्वारा पूर्ण सहयोग का न सिर्फ आश्वासन दिया गया बल्कि तमाम वैवाहिक रस्म को सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न भी कराया.

     जिसके कारण निर्धारित तिथि 20 अप्रैल को यह अनोखी शादी संपन्न हो गई. भले ही हमारे समाज में लाख कटुता फैल रही हो लेकिन इस अनोखी विवाह ने सामाजिक दायित्व का एक नया उदाहरण दिया है , और यह संदेश भी की बेटी बोझ नहीं होती. वह जब भी मुसीबत में पड़ेगी समाज उसके सहयोग के लिए खड़ा होगा.

     


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