आस्था ऐसी की शरीर में त्रिशूल चुभो कर भी चेहरे पर दर्द का एहसास नहीं, नजारा चड़क पूजा का

    आस्था ऐसी की शरीर में त्रिशूल चुभो कर भी चेहरे पर दर्द का एहसास नहीं, नजारा चड़क पूजा का

    दुमका (DUMKA) : दुमका प्रखंड स्थित रानिबहाल में चड़क मेला में लोगों की काफी भीड़ उमड़ी. बांग्ला पंचांग के अनुसार 11 बैशाख को चड़क मेला का आयोजन होता हैं. भक्त गांव के बड़ा बांध में स्नान कर शरीर में कंटीले त्रिशूल नुमा लोहे की तार घोप कर ग्राम परिक्रमा कर चड़क मंदिर पंहुच कर पूजा अर्चना करते हैं. यहां भुइयां, घटवाल, पाहाड़िया, महली, संताल, परघ, रजवार पुजारी की देखरेख में पूजा होती हैं. रानिबहाल के मिश्र परिवार मंदिर मे नित्य पूजा करते हैं. यहां के चड़क पूजा का इतिहास 300 साल  प्राचीन हैं. पूर्व में यह क्षेत्र बेचिरागी जंगल था. राजनगर राजा ने इस क्षेत्र को मुंगेर के गिद्धौऱ के राजा को यहां की जमीन  हस्तांतरण किया था. उसी समय राजनगर से लोगों को यहां लाकर बसाया गया था. राजनगर के राजा ने यहां के लोगों के लिये दुर्गा मंदिर, रक्षा काली मंदिर एवं चड़क मेला शुरू किया था.

    रिपोर्ट-पंचम झा


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