श्रावणी मेला का बदलता स्वरूप, तकनीक के सहारे श्रद्धालुओं को सुविधाएं मुहैया कराने का प्रयास

    श्रावणी मेला का बदलता स्वरूप, तकनीक के सहारे श्रद्धालुओं को सुविधाएं मुहैया कराने का प्रयास

    दुमका (DUMKA) : दुमका के बासुकीनाथ धाम में विश्व प्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला लगता है. सुल्तानगंज से जल भर कर पैदल देवघर पहुंचने वाले शिव भक्त बाबा बैद्यनाथ पर जलार्पण के बाद बासुकीनाथ धाम पहुंच कर फौजदारी बाबा पर जलार्पण करते हैं. यहां आने वाले श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो इसको लेकर जिला प्रशासन द्वारा महीनों पूर्व मेला की तैयारी शुरू कर दी जाती है. यही वजह है कि समय के साथ मेला के स्वरूप में बदलाव नजर आता है.

    बासुकीनाथ धाम में पहली बार AI से लेकर QR कोड तक

    इस वर्ष श्रावणी मेला की शुरुआत हो चुकी है. सावन के पावन महीने में शिवभक्त बासुकीनाथ धाम पहुंचने लगे है. मासव्यापी मेला में समय के साथ भक्तों की भीड़ उमड़ेगी. यहां आने वाले शिव भक्तों को कोई परेशानी न हो इसको लेकर प्रशासनिक स्तर पर मुकम्मल व्यवस्था की गई है. इस वर्ष श्रद्धालुओं तक सुविधा पहुंचाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कुछ ज्यादा ही किया जा रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, क्यूआर बेस कंप्लेन सिस्टम, चैट बोट जैसी तकनीक के सहारे श्रद्धालुओं की सुविधा का ख्याल रखा जा रहा है.

    जिला प्रशासन का प्रयास, श्रद्धालु को मिले सुविधा, समस्या का हो त्वरित समाधान

    मेला में तकनीक का इस्तेमाल पर डीसी अभिजीत सिन्हा ने कहा कि आज का समय टेक्नोलॉजी का है. हर तरफ एआई की चर्चा होती है. पहली बार बासुकिनाथ धाम में श्रावणी मेला एआई से मॉनिटरिंग हो रहा है ताकि रूट लाइन को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सके. जिससे भगदड़ की स्थिति उत्पन्न न हो. इसके अलावे मेला क्षेत्र पर ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है. पहली बार क्यू आर बेस कंप्लेन सिस्टम विकसित किया गया है. पूरे मेला क्षेत्र में क्यू आर लगाया गया है. बिजली, पानी, शौचालय, गंदगी जैसी समस्याओं को लेकर भक्त QR स्कैन कर फोटो के साथ समस्या भेज सकते है. मकशद बस एक ही है कि समस्या जिला प्रशासन तक पहुंचे ताकि उसका त्वरित समाधान हो सके. पहली बार QR बेस चैट बोट विकसित किया गया है. QR स्कैन कर भक्त मेला क्षेत्र में शासन और प्रशासन द्वारा उपलब्ध सुविधाओं के लोकेशन की जानकारी चैट बोट के माध्यम से ले सकते है.

    कुल मिलाकर कहें तो समय के साथ साथ बासुकीनाथ मेला के स्वरूप में बदलाव दिख रहा है. इस बार रूट लाइन में भी बदलाव किया गया है. यह बदलाव श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रख कर किया गया है. वैसे भी आज का दौर टेक्नोलॉजी का है. तकनीक ने मानव के हर काम को आसान किया है.

     

     

     

     

     

     


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